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    इंसानियत वहाँ दम तोड़ देती है जब एक इंसान की मजबूरी दूसरे के लिए तमाशा बन जाती है

    Mohammed

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    स्रोत : www.yourquote.in

    इंसानियत वहा दम तोड़ देती है, जहाँ किसी की मजबुरी दुसरो के लिये तमाशा बन जाती है

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    इंसानियत वहा दम तोड़ देती है, जहाँ किसी की मजबुरी दुसरो के लिये तमाशा बन जाती है

    स्रोत : indiascreen.ir

    मुक्तक 2021

    आज़ाद गज़लें संग्रह पत्थर पे फूल खिला सकते हो क्या सोई हुई ज़मीर जगा सकते हो क्या । बड़ा गरूर है अपने तरक़्क़ी पर तुम्हें मरे हुए को भी जिला सकते हो क्या । बड़े आए हो यहाँ तुम मसीहा बनकर पत्थरों को भी पिघला सकते हो क्या । किस वहम-ओ-गुमान में जी रहें हो […]

    मुक्तक 2021

    स्रोत : sahityapedia.com

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    Mohammed 9 month ago
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