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    ओलिंपिक खेलों के किस संस्करण में महेश भूपति और लीएंडर पेस ने रॉजर फेडरेर और यीव अलेग्रो को युगल प्रतिस्पर्धा में हराया था?

    Mohammed

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    महेश भूपति

    आम तौर पर हम दुनिया को सर्व मानव ज्ञान का योग बनाने के लिए आमंत्रित करते हैं। अब, हम दुनिया को सर्व मानव ज्ञान की ध्वनि बनाने के लिए आमंत्रित कर रहे हैं।

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    महेश भूपति

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    महेश भूपति

    महेश भूपति

    देश  भारतनिवासजन्म 7 जून 1974 (आयु 48)जन्म स्थान मद्रासकद 1.85 मीटर (6 फुट 1 इंच)वज़न 89 किग्रा (196 पाउन्ड)व्यवसायिक बनाखेल शैलीव्यवसायिक पुरस्कार राशिएकलकैरियर रिकार्ड:कैरियर उपाधियाँ: {{{singlestitles}}}सर्वोच्च वरीयता: {{{highestsinglesranking}}}ग्रैंड स्लैम परिणामऑस्ट्रेलियाई ओपन {{{AustralianOpenresult}}}फ़्रेंच ओपन {{{FrenchOpenresult}}}विम्बलडन {{{Wimbledonresult}}}अमरीकी ओपन {{{USOpenresult}}}युगलकैरियर रिकार्ड: {{{doublesrecord}}}कैरियर उपाधियाँ: {{{doublestitles}}}सर्वोच्च वरीयता: {{{highestdoublesranking}}}

    महेश भूपति (जन्म: 7 जून, 1974) एक भारत के पेशेवर टेनिस खिलाड़ी हैं। लिएंडर पेस के साथ मिलकर उन्होंने तीन डबल्स खिताब जीते हैं जिनमें 1999 का विबंलडन का खिताब भी शामिल है। साल 1999 भूपति के लिए स्वर्णिम वर्ष साबित हुआ क्योंकि इसमें उन्होंने अमेरिकी ओपन मिश्रित खिताब जीता और फिर लिएंडर पेस के साथ रोलां गैरां और विंबलडन समेत तीन युगल ट्राफी अपने नाम की। वह और पेस सभी ग्रैंड स्लैम टूर्नामेंटों के फाइनल में पहुंचने वाली पहली युगल जोड़ी बने थे। साल 1999 में ही दोनों को युगल की विश्व रैंकिंग में पहली भारतीय टीम बनने का गौरव हासिल हुआ। ओपन युग में 1952 के बाद यह पहली उपलब्धि थी। हालांकि बीच के सालों में महेश भूपति और लिएंडर पेस के बीच कुछ मतभेद हो गए जिसकी वजह से दोनों ने एक-दूसरे के साथ खेलना बंद कर दिया पर 2008 बीजिंग ओलंपिक्स के बाद से उन्होंने पुनः साथ-साथ खेलना शुरू कर दिया।[1]

    अनुक्रम

    1 कैरियर आँकड़े

    1.1 ग्रैंड स्लैम युगल फाइनल

    1.1.1 विजय () 1.1.2 उप-विजेता ()

    1.2 ए टी पी मास्टर्स सीरीज़ युगल फाइनल

    1.2.1 विजय () 1.2.2 उप-विजेता () 1.3 कैरियर फाइनल 1.3.1 युगल 1.3.2 विजय () 1.3.3 उप-विजेता () 2 सन्दर्भ

    कैरियर आँकड़े[संपादित करें]

    ग्रैंड स्लैम युगल फाइनल[संपादित करें]

    विजय ()[संपादित करें]

    वर्ष प्रतियोगिता साथी प्रतिद्वंदी फाइनल में स्कोर फाइनल में

    2002 अमरीकी ओपन मैक्स मिरन्यी जिरी नोवाक

    रादेक स्तेपानेक 63 36 64

    उप-विजेता ()[संपादित करें]

    वर्ष प्रतियोगिता साथी प्रतिद्वंदी फाइनल में स्कोर फाइनल में

    2009 ऑस्ट्रेलियाई ओपन मार्क नोल्स बॉब ब्रायन

    माइक ब्रायन 2-6, 7-5, 6-0

    1999 अमरीकी ओपन लिएंडर पेस सेबेस्तियन लारूह

    एलेक्स ओ ब्रायन 76 64

    1999 ऑस्ट्रेलियाई ओपन लिएंडर पेस योनास ब्योर्कमैन

    पैट्रिक रैफ्टर 6-3 4-6 6-4 610-712 6-4

    ए टी पी मास्टर्स सीरीज़ युगल फाइनल[संपादित करें]

    विजय ()[संपादित करें]

    वर्ष प्रतियोगिता साथी प्रतिद्वंदी फाइनल में स्कोर फाइनल में

    2007 कनाडा मास्टर्स पावेल विज़नर पॉल हैनली

    केविन उलियेट 6–4, 6–4

    2004 रोम मास्टर्स मैक्स मिरन्यी वेन आरथर्स

    पॉल हैनली 1-6, 6-4, 7-6

    2004 कनाडा मास्टर्स लिएंडर पेस योनास ब्योर्कमैन

    मैक्स मिरन्यी 6–4, 6–2

    2003 कनाडा मास्टर्स मैक्स मिरन्यी योनास ब्योर्कमैन

    टॉड वुडब्रिज 6–3, 7–6(4)

    2003 मोंटे कार्लो मास्टर्स मैक्स मिरन्यी मिकाएल लोद्रा

    फैब्रिस सैंतोरो 4-6, 7-5, 6-2

    2003 मैड्रिड मास्टर्स मैक्स मिरन्यी वेन ब्लैक

    केविन उलियेट 6–2, 2–6, 6–3

    1998 पेरिस मास्टर्स लिएंडर पेस जैको एल्टिंग

    पॉल हारहुईस 7-6, 7-6

    1998 रोम मास्टर्स लिएंडर पेस ऐलिस फरेरा

    रिक लीच 6-4, 4-6, 7-6

    उप-विजेता ()[संपादित करें]

    वर्ष प्रतियोगिता साथी प्रतिद्वंदी फाइनल में स्कोर फाइनल में

    2008 मोंटे कार्लो मास्टर्स मार्क नोल्स रफ़ाएल नदाल

    टॉमी रॉबरी्डो 6–3, 6–3

    2008 मियामी मास्टर्स मार्क नोल्स बॉब ब्रायन

    माइक ब्रायन 6-2, 6-2

    2008 मैड्रिड मास्टर्स मार्क नोल्स मारिऊत्ज़ फाइरस्टैनबर्ग

    मार्सिन मत्कोवस्की 6–4, 6–2

    2005 पेरिस मास्टर्स मार्क नोल्स बॉब ब्रायन

    माइक ब्रायन 6-4, 6-7(3), 6-4

    2003 हैमबर्ग मास्टर्स मैक्स मिरन्यी मार्क नोल्स

    डेनियल नैस्टर 6-4, 6-4

    2002 मैड्रिड मास्टर्स मैक्स मिरन्यी मार्क नोल्स

    डेनियल नैस्टर 6–3, 7–5, 6–0

    2002 सिनसिनाटी मास्टर्स मैक्स मिरन्यी जेम्स ब्लेक

    टॉड मार्टिन 7-5, 6-3

    2001 पेरिस मास्टर्स लिएंडर पेस ऐलिस फरेरा

    रिक लीच 5-7, 7-6(2), 6-4

    1998 स्टुटगार्ट मास्टर्स लिएंडर पेस सेबेस्तियन लारूह

    एलेक्स ओ ब्रायन 6–3, 3–6, 7–5

    कैरियर फाइनल[संपादित करें]

    युगल[संपादित करें]

    विजय ()[संपादित करें]

    वर्ष प्रतियोगिता साथी प्रतिद्वंदी फाइनल में स्कोर फाइनल में

    2008 दुबई टेनिस प्रतियोगिता मार्क नोल्स मार्टिन डैम

    पावेल विज़नर 7–5, 7–6

    2007 कनाडा मास्टर्स पावेल विज़नर पॉल हैनली

    केविन उलियेट 6–4, 6–4

    2007 पायलट पेन टेनिस नेनाद ज़िमोन्विक मारिऊत्ज़ फाइरस्टैनबर्ग

    मार्सिन मत्कोवस्की 6–3, 6–3

    2004 रोम मास्टर्स मैक्स मिरन्यी वेन आरथर्स

    पॉल हैनली 1-6, 6-4, 7-6

    2004 कनाडा मास्टर्स लिएंडर पेस योनास ब्योर्कमैन

    मैक्स मिरन्यी 6–4, 6–2

    2004 दुबई टेनिस प्रतियोगिता फैब्रिस सैंतोरो योनास ब्योर्कमैन

    लिएंडर पेस 6–2, 4–6, 6–4

    स्रोत : hi.wikipedia.org

    लिएंडर पेस और महेश भूपति: इंडियन एक्सप्रेस की उपलब्धियां

    भारत के लिएंडर पेस और महेश भूपति की सर्वश्रेष्ठ युगल टेनिस जोड़ी के बारे में हिंदी में पढ़ें। ली-हेश ने तीन ग्रैंड स्लैम खिताब जीते हैं।

    लिएंडर पेस-महेश भूपति: द इंडियन एक्सप्रेस और टेनिस इन वंडरलैंड!

    'ली-हेश' ने एक साथ तीन ग्रैंड स्लैम खिताब जीते, और विश्व नंबर 1 पर पहुंच गए और लगातार सबसे अधिक बार डेविस कप जीत रिकॉर्ड अपने नाम किया।

    लेखक प्रभात दुबे

    फोटो क्रेडिट Getty Images

    1996 में, लिएंडर पेस ने अटलांटा ओलंपिक में कांस्य पदक के साथ 1952 के बाद व्यक्तिगत ओलंपिक पदक जीतकर पहला भारतीय बनकर इतिहास रच दिया था।

    खास बात ये रही कि यह भारतीय टेनिस का पहला ओलंपिक पदक था और पिछले तीन ओलंपिक खेलों में भारत के पदक के सूखे को समाप्त किया।

    1997 में, महेश भूपति ने इतिहास रच दिया जब वह जापान के रिका हिराकी के साथ फ्रेंच ओपन मिक्स्ड युगल जीतकर ग्रैंड स्लैम खिताब जीतने वाले पहले भारतीय बने।

    उसी साल, लिएंडर पेस और महेश भूपति दुनिया भर में पुरुष युगल प्रतियोगिताओं में नियमित रूप से टीम बनाकर खेलने लगे।

    लिएंडर पेस नेट में माहिर थे जबकि महेश भूपति एक मजबूत बेसलाइन खिलाड़ी थे - जिसका मतलब था कि वे एक-दूसरे के पूरक होंगे। इन दोनों का प्रसिद्ध चेस्ट-बम्प सेलिब्रेशन दुनियाभर में काफी फेमस था।

    यह जोड़ी, जिसे जल्द ही इंडियन एक्सप्रेस का नाम दिया गया, आने वाले वर्षों में सर्वश्रेष्ठ युगल जोड़ियों में से एक साबित हुई - तीन ग्रैंड स्लैम खिताब, 25 एटीपी टूर खिताब जीतकर, दुनिया में नंबर 1 पर पहुंचना और अभी भी डेविस कप रिकॉर्ड कायम रखना, साथ ही युगल जीत का सबसे लंबा रिकार्ड भी।

    लिएंडर पेस और महेश भूपति की जोड़ी

    लिएंडर पेस और महेश भूपति ने पहली बार 1994 में टीम बनाई, 1995 और 1996 में कुछ एटीपी चैलेंजर स्तर के खिताब जीते और एक जोड़ी के रूप में डेविस कप में भी खेले।

    हालाँकि, 1997 में यह पहली बार था जब दोनों नियमित रूप से एक साथ खेले और यह एक शानदार हिट साबित हुआ।

    लिएंडर पेस और महेश भूपति ने अप्रैल 1997 में चेन्नई ओपन में एक साथ अपना पहला एटीपी टूर खिताब जीता, इसमें सबसे खास बात ये रही कि यह मैच घरेलू कोर्ट पर खेला गया था।

    इस जोड़ी ने उस साल क्ले और हार्ड कोर्ट में पांच और एटीपी टूर खिताब जोड़े, जिससे उनकी साझेदारी को एक ठोस शुरुआत मिली।

    1998 में, दोनों ने एक साथ छह और एटीपी टूर खिताब जीते और ऑस्ट्रेलियन ओपन, फ्रेंच ओपन और यूएस ओपन के सेमीफाइनल तक पहुंचे।

    भारतीय टेनिस को इस उभरती हुई साझेदारी के साथ जीवन का एक नायाब करिश्मा मिलता दिख रहा था और शायद जल्द ही इन्हें अपनी क्षमता का एहसास भी हुआ।

    द इंडियन एक्सप्रेस का गोल्डन ईयर: 1999

    सहस्राब्दी के अंत से पहले का वर्ष इस जोड़ी के लिए एक युग बनाने वाला साबित होगा, जिसे प्यार से ली-हेश के नाम से जाना जाता है।लिएंडर पेस और महेश भूपति सभी चार ग्रैंड स्लैम के पुरुष युगल फाइनल में पहुंचे। जिसमें फ्रेंच ओपन और विंबलडन के साथ ही चेन्नई में एटीपी टूर खिताब के अलावा, पुरुष युगल भी शामिल है।

    टेनिस रैंकिंग में यह जोड़ी विश्व नंबर-1 पर पहुंच गई। 1999 ऑस्ट्रेलियन ओपन, लिएंडर पेस के लिए पहला ग्रैंड स्लैम फाइनल था और महेश भूपति के लिए तीसरा। यह दोनों खिलाड़ियों का पहला पुरुष युगल ग्रैंड स्लैम फाइनल था।

    इस दौरान इंडियन एक्सप्रेस ने पहली वरीयता प्राप्त करते हुए ज्यादा कड़ी मेहनत की, लेकिन आखिर में स्वीडन के जोनास ब्योर्कमैन और ऑस्ट्रेलियाई पैट्रिक राफ्टर से 3-6, 6-4, 4-6, 7-6, 4-6 से हार गए।

    लेकिन खास ये रहा कि ली-हेश को उस पहले ग्रैंड स्लैम खिताब के लिए एक साथ लंबा इंतजार नहीं करना पड़ा।

    Leander Paes and Mahesh Bhupathi won the Wimbledon men's doubles title in 1999.

    फोटो क्रेडिट Getty Images

    1999 के फ्रेंच ओपन में, लिएंडर पेस और महेश भूपति ने फाइनल में क्रोएशियाई-अमेरिकी जोड़ी गोरान इवानसेविक और जेफ टारंगो को 6-2, 7-5 से हराकर ग्रैंड स्लैम चैंपियनशिप जीती और पहली अखिल भारतीय जोड़ी बन गई।

    इस जीत ने ली-हेश को पुरुष युगल में विश्व नंबर 1 पर पहुंचा दिया, एक रैंकिंग जो उन्हें पूरे साल बरकरार रखनी थी।

    इतना ही नहीं 1999 का विंबलडन और अधिक खुशी लेकर आया, क्योंकि लिएंडर और महेश ने नीदरलैंड के पॉल हारुइस और यूएसए के जेरेड पामर को 6-7, 6-3, 6-4, 7-6 से हराकर दूसरा ग्रैंड स्लैम अपने नाम नाम कर लिया।

    यह एक और प्यारी जीत थी, क्योंकि उस समय ग्रास कोर्ट पर इस जोड़ी का रिकॉर्ड बहुत अच्छा नहीं था।

    किसी को भरोसा नहीं था कि यह भारतीय जोड़ी यूएस ओपन के फाइनल में भी पहुंच जाएगी, लेकिन आगे जाकर भारतीय जोड़ी ने कनाडा-अमेरिकी जोड़ी

    सेबस्टियन लारेउ और एलेक्स ओ ब्रायन से 7-6, 6-4 से हार गई।

    भारतीय टेनिस - जिसने बिना अधिक सफलता के वर्षों तक बहुत कुछ देने का वादा किया था। जिसने आखिरकार ऐसे खिलाड़ी दिए जिन्हें निश्चित रूप से दुनिया में सर्वश्रेष्ठ में से एक कहा जा सकता था।

    अधिक सफलता और लिएंडर-महेश का अलग होना

    लिएंडर पेस और महेश भूपति ने अगले कुछ वर्षों तक अपनी शानदार साझेदारी जारी रखी, सात एटीपी टूर खिताब जीते, 2001 फ्रेंच ओपन में एक जोड़ी के रूप में उनका तीसरा और अंतिम ग्रैंड स्लैम खिताब था। और 2002 में एशियाई खेलों का स्वर्ण पदक हासिल किया।

    लेकिन उनके रिश्ते में कुछ दरारें आ गई थीं और उन्होंने 2002 में अलग होने का फैसला किया।

    आने वाले सालों में, महेश भूपति 2002 यूएस ओपन में बेलारूस के मैक्स मिर्नी के साथ पुरुष युगल खिताब खेलने उतरे थे, जबकि लिएंडर पेस चेक गणराज्य के मार्टिन डैम के साथ 2006 यूएस ओपन तक एक और पुरुष युगल ग्रैंड स्लैम नहीं जीत पाएं।

    दोनों ने मिक्स्ड डबल्स में ग्रैंड स्लैम की सफलता का स्वाद चखा।

    The 2001 French Open was Lee-Hesh's third and final Grand Slam title as a pair.

    फोटो क्रेडिट Getty Images

    2004 एथेंस ओलंपिक से पहले, ली-हेश ने एक बार फिर से टीम बनाने का फैसला किया और तुरंत बाद ही 2004 के कनाडाई मास्टर्स खिताब जीता। उनकी साझेदारी ने 2004 के ओलंपिक में एक साथ एक और जादुई क्षण बनाया।

    ली-हेश ने पुरुष युगल के पहले दौर में अमेरिकी जोड़ी मार्डी फिश-एंडी रोडिक को और दूसरे दौर में स्विस जोड़ी यवेस एलेग्रो-रोजर फेडरर को हराया।

    स्रोत : olympics.com

    लिएंडर पेस ने कहा कि महेश भूपति की वजह से लंदन ओलंपिक में नहीं जीत सके थे मेडल

    भारतीय टेनिस को नए मुकाम पर पहुंचाने में अहम भूमिका निभाने वाले लिएंडर पेस ने साफ किया कि उन्होंने कभी सर्बिया के खिलाफ डेविस कप विश्व ग्रुप प्लेऑफ में खेलने से मना नहीं किया और वह हर समय देश की तरफ से खेलने के लिए तैयार हैं. इतना ही नहीं उन्होंने कहा कि महेश भूपति की वजह से उनके लिए लंदन ओलंपिक बुरा रहा था.

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    लिएंडर पेस ने कहा कि महेश भूपति की वजह से लंदन ओलंपिक में नहीं जीत सके थे मेडल

    लिएंडर पेस ने कहा कि महेश भूपति की वजह से लंदन ओलंपिक में नहीं जीत सके थे मेडल भारतीय टेनिस को नए मुकाम पर पहुंचाने में अहम भूमिका निभाने वाले लिएंडर पेस ने साफ किया कि उन्होंने कभी सर्बिया के खिलाफ डेविस कप विश्व ग्रुप प्लेऑफ में खेलने से मना नहीं किया और वह हर समय देश की तरफ से खेलने के लिए तैयार हैं. इतना ही नहीं उन्होंने कहा कि महेश भूपति की वजह से उनके लिए लंदन ओलंपिक बुरा रहा था.

    लिएंडर पेस

    aajtak.in

    नई दिल्ली, 27 अप्रैल 2014,

    (अपडेटेड 27 अप्रैल 2014, 8:21 PM IST)

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    भारतीय टेनिस को नए मुकाम पर पहुंचाने में अहम भूमिका निभाने वाले लिएंडर पेस ने साफ किया कि उन्होंने कभी सर्बिया के खिलाफ डेविस कप विश्व ग्रुप प्लेऑफ में खेलने से मना नहीं किया और वह हर समय देश की तरफ से खेलने के लिए तैयार हैं. इतना ही नहीं उन्होंने कहा कि महेश भूपति की वजह से उनके लिए लंदन ओलंपिक बुरा रहा था.

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    महेश की वजह से नहीं जीते लंदन ओलंपिक में पदक

    भूपति के साथ जोड़ी बनाने के बारे में पूछे जाने पर पेस ने कहा, 'नहीं ऐसा कभी नहीं होगा. व्यक्तिगत रूप से मेरा ध्यान ग्रैंडस्लैम और ओलंपिक पर है. मैं नहीं जानता कि महेश कितने समय तक कोर्ट पर रहेगा. उसने खेलना कम कर दिया है क्योंकि फिलहाल वह केवल दो टूर्नामेंट में खेला है. उन्होंने कहा, 'लेकिन मेरे लिए अपने लक्ष्य तक पहुंचना महत्वपूर्ण है. यहां तक कि मेरा पूरा एकल करियर महेश के आने से पहले तक चला जिसमें मुझे सफलता मिली और मैंने ओलंपिक पदक जीता. पेस ने कहा, 'यहां तक कि वह संन्यास ले लेता है तो भी मेरा लक्ष्य रियो ओलंपिक में जगह बनाना और पदक जीतना है. महेश की वजह से लंदन में पिछला ओलंपिक मेरे लिए बुरा रहा. उन्होंने न सिर्फ पदक जीतने की मेरी उम्मीदों पर पानी फेरा बल्कि भारत ने भी पदक जीतने का मौका गंवाया.'

    महेश के साथ नहीं बनाऊंगा जोड़ी...

    पद्म भूषण से सम्मानित होने के बाद पेस ने एक टीवी चैनल को दिए इंटरव्यू में कई मुद्दों पर खुलकर बात की. पेस से जब सर्बिया के खिलाफ डेविस कप खेलने के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा, 'मुझसे पूछा गया था कि क्या मैं देश की तरफ से खेलूंगा? मेरा जवाब था कि मैं देश के लिए अपना कर्तव्य निभाने से कभी दूर नहीं भागा. इसके बाद मुझसे पूछा गया मैं खिलाड़ी, कप्तान और इस तरह की किस भूमिका में आना चाहूंगा, इस सवाल के लिए भी मेरा जवाब पहले जैसा ही था. इसे गलत तरीके से लिया गया. जहां तक मेरा सवाल है तो मैं देश की तरफ से खेलने के लिए तैयार हूं. अगर सर्बिया के खिलाफ होने वाले मुकाबले के लिए मेरी जरूरत पड़ती है और अगर मुझे खिलाड़ी या कप्तान किसी भी भूमिका में उतारा जाता है, तो मैं अपना सर्वश्रेष्ठ देने की कोशिश करूंगा.' पेस ने कहा, 'मेरे पास एआईटीए से बुलावा आना चाहिए मैं भारत के लिए अपना सर्वश्रेष्ठ दूंगा. भारत में एआईटीए टेनिस चलाता है और अगर उन्हें लगता है कि मेरी उपस्थिति से बदलाव हो सकता है तो फिर सर्बिया के खिलाफ मुकाबले के लिए टीम के साथ रहूंगा.' इससे पहले रिपोर्टों में कहा गया था कि पेस सितंबर में होने वाले मुकाबले के लिए उपलब्ध नहीं रहेंगे लेकिन इस दिग्गज खिलाड़ी ने कहा कि उनके बयान को गलत तरीके से पेश किया गया. उन्होंने हालांकि साफ किया कि वह अपने पुराने साथी महेश भूपति के साथ जोड़ी नहीं बनाएंगे.

    मेरी नजर 2016 ओलंपिक खेलने पर...

    पेस ने इसके साथ ही कहा कि उनका अगला लक्ष्य रियो डि जनेरियो में 2016 में होने वाले ओलंपिक खेलों में पदक जीतना है जो उनके करियर का सातवां ओलंपिक होगा. लॉस एंजिल्स 1996 में एकल में कांस्य पदक जीतने वाले इस 40 वर्षीय खिलाड़ी ने कहा, 'मेरा लक्ष्य 2016 ओलंपिक खेलों में भाग लेना है जो कि मेरा सातवां ओलंपिक होगा. रियो ओलंपिक में अब केवल दो साल का समय है और यह वास्तविक लक्ष्य है. मैं पुरुष युगल में टॉप टेन में शामिल हूं और मैंने छह महीने पहले आखिरी ग्रैंडस्लैम जीता था. इसलिए मेरे लिए लंबी समय के लक्ष्य को हासिल करने के लिए जज्बा बनाये रखना महत्वपूर्ण है.'

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    स्रोत : www.aajtak.in

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    Mohammed 7 day ago
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