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    किस लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व अभी तक किसी प्रधानमंत्री ने नहीं किया है

    Mohammed

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    भारत निर्वाचन आयोग

    परिचय भारत, शासन की संसदीय प्रणाली के साथ एक संवैधानिक लोकतंत्र है, और इस प्रणाली के केन्द्र में नियमित, स्वतंत्र एवं निष्पक्ष निर्वाचनों को आयोजित करने के प्रति प्रतिबद्धता है। ये निर्वाचन सरकार की संरचना, संसद के दोनों सदनों, राज्यो एवं संघ राज्य-क्षेत्र की विधान सभाओं की सदस्यता, और राष्ट्रपतित्व एवं उप-राष्ट्रपतित्व का निर्धारण करते […]

    भारत निर्वाचन आयोग

    भारत निर्वाचन आयोग परिचय

    भारत, शासन की संसदीय प्रणाली के साथ एक संवैधानिक लोकतंत्र है, और इस प्रणाली के केन्द्र में नियमित, स्वतंत्र एवं निष्पक्ष निर्वाचनों को आयोजित करने के प्रति प्रतिबद्धता है। ये निर्वाचन सरकार की संरचना, संसद के दोनों सदनों, राज्यो एवं संघ राज्य-क्षेत्र की विधान सभाओं की सदस्यता, और राष्ट्रपतित्व एवं उप-राष्ट्रपतित्व का निर्धारण करते हैं।

    निर्वाचन, संवैधानिक उपबंधों, जिनका संसद द्वारा बनाए गए कानूनों के द्वारा अनुपूरण किया जाता है, के अनुसार संचालित किए जाते हैं। प्रमुख कानून हैं-लोक प्रतिनिधित्वक अधिनियम, 1950, जो मुख्यतया निर्वाचक नामावलियों की तैयारी एवं पुनरीक्षण से सबंधित हैं, लोक प्रतिनिधित्व‍ अधिनियम, 1951 जिसमें निर्वाचनों के संचालन और निर्वाचन उपरांत विवादों के सभी पहलुओं का विस्तृत विवरण है। भारत के उच्चतम न्यांयालय ने अभिनिर्धारित किया है कि जहां निर्वाचनों के संचालन में किसी दी गई स्थिति से निपटने के लिए अधिनियमित कानून चुप है या अपर्याप्ता उपबंध किए गए हैं तो निर्वाचन आयोग के पास उपयुक्त तरीके से कार्रवाई करने के लिए संविधान के अधीन अवशिष्ट शक्तियां हैं।

    निर्वाचन-क्षेत्र एवं सीटों का आरक्षण

    देश को 543 संसदीय निर्वाचन-क्षेत्रों में विभाजित किया गया है जिनमें से प्रत्येक संसद के निचले सदन, लोक सभा के लिए एक सांसद को निर्वाचित करता है। संसदीय निर्वाचन-क्षेत्रों के आकार एवं बाह्यरूप का एक स्वतंत्र परिसीमन आयोग द्वारा निर्धारण किया जाता है जिसका उद्देश्य ऐसे निर्वाचन-क्षेत्रों का गठन करना होता है जिनमें भौगोलिक विचारणीयताओं और राज्यों एवं प्रशासनिक क्षेत्रों की सीमाओं के अधीन मोटे तौर पर एक समान आबादी हो।

    संसद

    संघ की संसद राष्ट्रपति, लोक सभा और राज्य सभा से बनी होती है। राष्ट्रपति राष्ट्राध्यक्ष होते हैं, और वे प्रधानमंत्री को नियुक्त करते हैं जो लोक सभा की राजनीतिक संरचना के अनुसार सरकार चलाते हैं। हालांकि, सरकार की अध्यक्षता प्रधान मंत्री द्वारा की जाती है फिर भी, मंत्रिमंडल निर्णय लेने वाला केन्द्रीय निकाय होता है। एक से अधिक दल के सदस्य सरकार बना सकते हैं, और हालांकि, शासक दल लोक सभा में अल्प मत में हो सकते हैं फिर भी, वे केवल तभी तक शासन कर सकते हैं जब तक कि उन्हें सांसदों, जो लोक सभा के सदस्य हैं, के बहुमत का विश्वास प्राप्तं होता है। लोक सभा, वह निकाय होने के साथ सरकार कौन बनाए, राज्य सभा के साथ मुख्य विधायी निकाय है।

    राज्य सभा

    राज्य सभा के सदस्य अप्रत्यक्ष रूप से निर्वाचित किए जाते हैं न कि समस्त नागरिकों के द्वारा अधिकतर संघीय प्रणालियों के उलट प्रत्येक राज्य द्वारा निर्वाचित सदस्यों की संख्या कमोबेश उनकी आबादी के अनुपात में होती है। वर्तमान में, विधान सभाओं द्वारा राज्य सभा के 233 सदस्य निर्वाचित किए जाते हैं, और राष्ट्रपति द्वारा साहित्य, विज्ञान, कला एवं सामाजिक सेवाओं के प्रतिनिधियों के रूप में बारह सदस्य भी नामित किए जाते हैं। राज्य सभा सदस्य छह वर्षों के लिए सेवा दे सकते हैं, और प्रत्येक 2 वर्षों में एक तिहाई विधान सभा निर्वाचित होने के साथ निर्वाचन सांतरित होते हैं।

    नामित सदस्य

    राष्ट्रपति यदि यह महसूस करते हैं कि आंग्ल-भारतीय समुदाय का प्रतिनिधित्व अपर्याप्त है तो वे लोकसभा के 2 सदस्यों को नामित कर सकते हैं, और साहित्य, विज्ञान, कला एवं सामाजिक सेवाओं का प्रतिनिधित्व करने के लिए राज्य सभा के 12 सदस्यों को नामित कर सकते हैं।

    राज्य विधान सभाएं

    भारत एक संघीय देश हैं, और संविधान राज्यों एवं संघ राज्या-क्षेत्रों को अपनी स्वयं की सरकार के ऊपर उल्लेंखनीय नियंत्रण का अधिकार देता है। विधान सभाएं (विधायी सभाएं) भारत के 28 राज्यों में सरकार का प्रशासन सम्पांदित करने के लिए स्थाापित प्रत्यवक्ष रूप से निर्वाचित निकाय होती हैं। कुछ राज्यों में, ऊपरी एवं निचले दोनों सदनों के साथ विधान-मंडलों के द्विसदनीय संगठन हैं। सात संघ राज्यो-क्षेत्रों में से दो नामत:, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र, दिल्ली और पांडिचेरी में भी विधान सभाएं हैं।

    विधान सभाओं के निर्वाचन, राज्योंं और संघ राज्य-क्षेत्रों को एकल-सदस्यी्य निर्वाचन-क्षेत्रों में विभाजित कर दिए जाने के साथ, लोक सभा निर्वाचन की ही तरह निष्पा दित किए जाते हैं। इसमें भी सबसे आगे रहने वाली निर्वाचन प्रणाली का इस्तेमाल किया जाता है। विधान सभाएं, आबादी के अनुसार, अलग-अलग साइज में होती हैं। 403 सदस्यों के साथ, उत्तर प्रदेश सबसे बड़ी विधान सभा है:, 30 सदस्योंं के साथ पांडिचेरी सबसे छोटी विधान सभा है।

    राष्ट्रपति और उप-राष्ट्रपति

    राष्ट्रपति विधान सभाओं, लोक सभा, और राज्य सभा के निर्वाचित सदस्यों द्वारा निर्वाचित किए जाते हैं, और 5 वर्ष की अवधि के लिए काम करते हैं (हालांकि वे पुनर्निर्वाचन के लिए खड़े हो सकते हैं)। मतों का आवंटन करने के लिए एक फार्मूले का उपयोग किया जाता है ताकि प्रत्येक राज्य की आबादी और एक राज्य के विधान सभा सदस्य कितनी संख्या में मत डाल सकते हैं, के बीच संतुलन बना रहे, और राज्य विधान सभा सदस्यों और राष्ट्रीय संसद के सदस्यों के बीच एक समान संतुलन मिले। यदि किसी भी अभ्यर्थी को अधिसंख्य मत नहीं मिले तो एक प्रणाली है जिसके द्वारा हारने वाले अभ्यर्थी स्पर्धा से बाहर हो जाते हैं और उनके मत अन्य अभ्यर्थियों को तब तक अंतरित होते रहते हैं जब तक कि एक अभ्यर्थी बहुमत न प्राप्त कर ले। उप-राष्ट्रपति लोक सभा और राज्य सभा के निर्वाचित एवं नामित सभी सदस्यों के प्रत्यक्ष मत के द्वारा निर्वाचित होते हैं।

    कौन मतदान कर सकता है?

    भारत मे लोकतांत्रिक प्रणाली सर्वसुलभ वयस्क मताधिकार के इस सिद्धांत पर आधारित है; कि 18 साल की आयु का कोई भी नागरिक निर्वाचन में मत डाल सकता है (1989 के पहले आयु सीमा 21 वर्ष थी)। मत देने का अधिकार जाति, पंथ, धर्म या लिंग का लिहाज किए बिना है। जो लोग विक्षिीप्त दिमाग के माने जाते हैं, और जो कतिपय आपराधिक अपराधों में दोष-सिद्ध किए गए हैं, उन्हें मत देने की अनुमति नहीं है।

    निर्वाचन-क्षेत्र एवं सीटों का आरक्षण

    देश को 543 संसदीय निर्वाचन-क्षेत्रों में विभाजित किया गया है जिनमें से प्रत्येक संसद के निचले सदन, लोक सभा के लिए एक सांसद को निर्वाचित करता है। संसदीय निर्वाचन-क्षेत्रों के आकार एवं बाह्यरूप का एक स्वतंत्र परिसीमन आयोग द्वारा निर्धारण किया जाता है जिसका उद्देश्य ऐसे निर्वाचन-क्षेत्रों का गठन करना होता है जिनमें भौगोलिक विचारणीयताओं और राज्यों एवं प्रशासनिक क्षेत्रों की सीमाओं के अधीन मोटे तौर पर एक समान आबादी हो।

    स्रोत : shamli.nic.in

    लोक सभा निर्वाचन क्षेत्रों की सूची

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    भारत के लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र

    भारत के संविधान के अनुसार लोक सभा का गठन वयस्‍क मतदान के आधार पर प्रत्‍यक्ष चुनाव द्वारा चुने गए जनता के प्रतिनिधियों से होता है। सभा के सदस्‍यों की अधिकतम संख्‍या ५५२ है जैसा कि संविधान में उल्‍लेख किया गया है जिसमें ५३० सदस्‍य राज्‍यों का, २० सदस्‍य संघ राज्‍य क्षेत्रों का प्रतिनिधित्‍व करते हैं और महामहिम राष्‍ट्रपति महोदय, यदि ऐसा मानते हैं कि आंग्‍ल भारतीय समुदाय को सभा में उचित प्रतिनिधित्‍व नहीं मिला है तो उस समुदाय से अधिकतम दो सदस्‍यों को नामित कर सकते हैं। कुल निर्वाचित सदस्‍यता राज्‍यों में इस प्रकार वितरित की गई है कि प्रत्‍येक राज्‍य को आबंटित सीटों की संख्‍या और उस राज्‍य की जनसंख्‍या के मध्‍य अनुपात, जहाँ तक व्‍यवहार्य हो, सभी राज्‍यों के लिए समान रहे।

    अनुक्रम

    1 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की निर्वाचन क्षेत्रों की सूची

    2 राज्यवार निर्वाचन क्षेत्र

    3 आंध्र प्रदेश 4 अरुणाचल प्रदेश 5 असम 6 बिहार 7 छत्तीसगढ़ 8 गुजरात 9 गोवा 10 हिमाचल प्रदेश 11 हरियाणा 12 झारखंड 13 जम्मू और कश्मीर 14 केरल 15 कर्नाटक 16 मेघालय 17 महाराष्ट्र 18 मणिपुर 19 मध्य प्रदेश 20 मिजोरम 21 नागालैंड 22 उड़ीसा 23 पंजाब 24 राजस्थान 25 सिक्किम 26 तमिल नाडु 27 तेलंगाना 28 त्रिपुरा 29 उत्तर प्रदेश 30 उत्तराखंड 31 पश्चिम बंगाल

    32 केंद्र शासित प्रदेशों की निर्वाचन क्षेत्रों की सूची

    33 अंडमान और निकोबार द्वीप समूह

    34 चंडीगढ़

    35 दादरा और नगर हवेली

    36 दमन और दीव 37 लक्षद्वीप 38 दिल्ली का एनसीटी 39 पुदुचेरी 40 बाहरी कड़ियाँ

    राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की निर्वाचन क्षेत्रों की सूची

    राज्य / केंद्र शासित प्रदेश लोकसभा सीटें अनुसुचित जाति अनुसुचित जनजाति

    आंध्र प्रदेश 25 4 1

    अरुणाचल प्रदेश 2 - -

    असम 14 1 2 बिहार 40 6 छत्तीसगढ़ 11 1 4 गोवा 2 - - गुजरात 26 2 4 हरियाणा 10 2 - हिमाचल प्रदेश 4 1 -

    जम्मू और कश्मीर 6 - -

    झारखंड 14 1 5 कर्नाटक 28 5 2 केरल 20 2 - मध्य प्रदेश 29 4 6 महाराष्ट्र 48 5 4 मणिपुर 2 - 1 मेघालय 2 - 2 मिजोरम 1 - 1 नागालैंड 1 - - ओडिशा 21 3 5 पंजाब 13 4 - राजस्थान 25 4 3 सिक्किम 1 - - तमिलनाडु 39 7 - तेलंगाना 17 3 2 त्रिपुरा 2 - 1

    उत्तर प्रदेश 80 17 -

    उत्तराखंड 5 1 -

    पश्चिम बंगाल 42 10 2

    अंडमान और निकोबार द्वीप समूह 1

    चंडीगढ़ 1 - -

    दादरा और नगर हवेली 1 - 1

    दमन और दीव 1 - - लक्षद्वीप 1 - 1

    दिल्ली का एनसीटी 7 1 -

    पुदुचेरी 1 - -

    राज्यवार निर्वाचन क्षेत्र

    भारत के राज्यों में लोक सभा निर्वाचन क्षेत्रों की सूची इस प्रकार से है:-

    म सं. राज्य का नाम mp सदस्य संख्या

    1 [दिखाएँ] देवासं

    आंध्र प्रदेश के लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र

    25 2 [दिखाएँ] देवासं

    पूर्वोत्तर राज्यों के लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र

    2 3 [दिखाएँ] देवासं

    असम के लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र

    14 4 [दिखाएँ] देवासं

    बिहार के लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र

    40 5 [दिखाएँ] देवासं

    छत्तीसगढ़ के लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र

    11 6 [दिखाएँ] देवासं

    गुजरात के लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र

    26 7 [दिखाएँ] देवासं

    गोवा के लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र

    2 8 [दिखाएँ] देवासं

    हिमाचल प्रदेश के लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र

    4 9 [दिखाएँ] देवासं

    हरियाणा के लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र

    10 10 [दिखाएँ] देवासं

    झारखंड के लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र

    14 11 [दिखाएँ] देवासं

    जम्मू एवं कश्मीर के लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र

    6 12 [दिखाएँ] देवासं

    केरल के लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र

    20 13 [दिखाएँ] देवासं

    कर्नाटक के लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र

    28 14 [दिखाएँ] देवासं

    पूर्वोत्तर राज्यों के लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र

    2 15 [दिखाएँ] देवासं

    महाराष्ट्र के लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र

    48 16 [दिखाएँ] देवासं

    पूर्वोत्तर राज्यों के लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र

    2 17 [दिखाएँ] देवासं

    मध्य प्रदेश के लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र

    29 18 [दिखाएँ] देवासं

    मिज़ोरम के लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र

    1 19 [दिखाएँ] देवासं

    नागालैंड के लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र

    1 20 [दिखाएँ] देवासं

    ओड़िशा के लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र

    21 21 [दिखाएँ] देवासं

    पंजाब के लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र

    13 22 [दिखाएँ] देवासं

    राजस्थान के लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र

    25 23 [दिखाएँ] देवासं

    सिक्किम के लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र

    1 24 [दिखाएँ] देवासं

    तमिल नाडु के लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र

    39 25 [दिखाएँ] देवासं

    तेलंगाना के लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र

    17 26 [दिखाएँ] देवासं

    पूर्वोत्तर राज्यों के लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र

    2 27 [दिखाएँ] देवासं

    उत्तर प्रदेश के लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र

    80 28 [दिखाएँ] देवासं

    स्रोत : hi.wikipedia.org

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    देश-देशांतर: जन प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 33(7) को चुनौती; एक उम्मीदवार-एक सीट

    संदर्भ एवं पृष्ठभूमि

    चुनाव का अधिकार ही वह अधिकार है, जो लोकतंत्र और तानाशाही में अंतर करता है। भारतीय चुनाव व्यवस्था में किसी एक प्रत्याशी को कई सीटों से चुनाव लड़ने की छूट है, लेकिन अब चुनाव आयोग इस प्रकार की व्यवस्था को खत्म करने का मन बना चुका है।

    हाल ही में किसी भी प्रत्याशी के एक से अधिक सीट से चुनाव लड़ने के खिलाफ सर्वोच्च न्यायालय में दायर याचिका पर अपना पक्ष रखते हुए चुनाव आयोग ने 'एक उम्मीदवार-एक सीट' पर चुनाव लड़ने का समर्थन किया।

    मामला क्या है?

    इस मामले में याचिकाकर्त्ता (भाजपा नेता और वकील अश्वनी उपाध्याय) ने जनहित याचिका दाखिल कर जन प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 33(7) को चुनौती देते हुए अपील की है कि संसद या विधानसभा सहित सभी स्तरों पर प्रत्याशी केवल एक ही सीट से चुनाव लड़े।

    धारा 33(7) में यह व्यवस्था की गई है कि कोई व्यक्ति दो सीटों से आम चुनाव अथवा कई उपचुनाव अथवा द्विवार्षिक चुनाव लड़ सकता है।

    मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा, ए.एम. खानविलकर और डी.वाई. चंद्रचूड़ की पीठ ने इस मामले में भारत के अटार्नी जनरल को अपनी राय देने का निर्देश दिया है।

    क्या है चुनाव आयोग का रुख?

    1996 से पूर्व कोई प्रत्याशी कितनी भी सीटों से चुनाव लड़ सकता था।

    वर्तमान में कोई भी प्रत्याशी लोकसभा तथा विधानसभा के लिये दो सीटों से चुनाव लड़ सकता है और दोनों जगह से जीतने पर एक सीट उसे छोड़नी पड़ती है।

    चुनाव आयोग ने स्वीकार किया कि जब एक प्रत्याशी दो सीट पर चुनाव लड़ता है, तो वह दूसरी सीट से इस्तीफा दे देता है, जिसके कारण वहाँ पर दोबारा चुनाव होता है और खर्चा बढ़ता है।

    इससे पहले चुनाव सुधार की प्रक्रिया में चुनाव आयोग ने कानून मंत्रालय को अपनी सिफारिश में कहा था कि एक प्रत्याशी को दो सीटों से चुनाव लड़ने की छूट नहीं होनी चाहिये। एक उम्मीदवार के दो सीटों से चुनाव लड़ने का प्रावधान समाप्त किया जाए।

    चुनाव आयोग ने कहा कि यदि सरकार इस प्रावधान को बनाए ही रखना चाहती है तो उपचुनाव का खर्च उठाने की ज़िम्मेदारी सीट छोड़ने वाले प्रत्याशी पर डाली जाए।

    विधानसभा व विधान परिषद के उपचुनाव के मामले में राशि 5 लाख रुपए और लोकसभा उपचुनाव में राशि 10 लाख रुपए होनी चाहिये। सरकार इसे समय-समय पर बढ़ा सकती है।

    दो सीटों पर चुनाव लड़ने से संसाधन की बर्बादी होती है क्योंकि 6 महीने के अंदर एक सीट खाली करनी ही होती है।

    चुनाव कौन लड़ सकता है?

    भारतीय संविधान के अनुच्छेद 84(क) में यह परिकल्पित है कि कोई व्यक्ति संसद में सीट को भरने के लिये चुने जाने हेतु तब तक पात्र नहीं होगा जब तक कि वह भारत का नागरिक न हो। संविधान के अनुच्छेद 173(क) में राज्य विधानसभाओं के लिये इसी प्रकार का प्रावधान है।

    भारतीय संविधान के अनुच्छेद 84(ख) में यह प्रावधान है कि लोकसभा निर्वाचन हेतु अभ्यर्थी होने के लिये न्यूनतम आयु 25 वर्ष होगी। लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 36(2) के साथ पठित संविधान के अनुच्छेद 173(ख) के द्वारा विधानसभाओं के अभ्यर्थी होने के लिये यही प्रावधान है।

    जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 4(घ) व्यक्ति को चुनाव लड़ने से प्रतिबंधित करती है जब तक कि वह किसी संसदीय निर्वाचन क्षेत्र में एक निर्वाचक न हो।

    जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 5(ग) में विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों के लिये यही प्रावधान है।

    जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 4(C), 4(CC) तथा 4(CCC) के अनुसार असम, लक्षद्वीप तथा सिक्किम को छोड़कर कोई भी मतदाता देश में किसी भी निर्वाचन क्षेत्र से लोकसभा का चुनाव लड़ सकता है।

    जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 8(3) के अनुसार यदि कोई व्यक्ति किसी अपराध का दोषी है तथा उसे 2 वर्ष या इससे अधिक की सज़ा दी गई है, तो वह चुनाव लड़ने के लिये अपात्र होगा।

    यद्यपि कोई व्यक्ति दोष सिद्ध‍होने के पश्चात् जमानत पर है, तथा उसकी अपील निपटान के लिये लंबित है, तो उसे भारत निर्वाचन आयोग द्वारा जारी किये गए दिशा-निर्देशों के अनुसार चुनाव लड़ने से निरर्हित किया जाता है।

    जन प्रतिनिधित्व, अधिनियम, 1951 की धारा 62(5) के अनुसार, जेल में बंद कोई भी व्यक्ति निर्वाचन में मत नहीं डालेगा, चाहे वह कारावास की सज़ा के अधीन हो या देश निकाला हो या पुलिस की कानूनी हिरासत में हो।

    चुनाव सुधारों पर विधि आयोग की रिपोर्ट

    मार्च 2015 में विधि आयोग ने चुनाव सुधारों पर अपनी 211 पन्नों की 255वीं रिपोर्ट सरकार को सौंपते समय चुनाव सुधार के अनेक उपाय सुझाए थे। इससे पहले भी चुनाव सुधारों पर विधि आयोग ने अपनी एक अन्य रिपोर्ट राजनीति का अपराधीकरण रोकने के लिये दागियों को चुनाव से बाहर रखने के बारे में दी थी।

    विधि आयोग ने उम्मीदवारों को एक से अधिक सीटों से चुनाव लड़ने से रोकने और निर्दलीय उम्मीदवारों की उम्मीदवारी प्रतिबंधित करने का सुझाव दिया था। इसके लिये जन प्रतिनिधित्व कानून की धारा 33 (7) को संशोधित करने की बात कही, जिसमें अभी उम्मीदवार को दो सीटों से चुनाव लड़ने की अनुमति है।

    मौजूदा व्यवस्था में चुनाव में बड़ी संख्या में निर्दलीय उम्मीदवार उतरते हैं, जिनमें से अधिकतर डमी उम्मीदवार होते हैं तथा कई तो एक ही नाम के होते हैं जिनका उद्देश्य मतदाताओं में भ्रम फैलाना होता है।

    विधि आयोग ने मुख्य चुनाव आयुक्त एवं दो अन्य आयुक्तों की नियुक्तियाँ निर्वाचन मंडल (कॉलेजियम) के ज़रिये करने की सिफारिश की थी।

    चुनाव में शुचिता बरकरार रखने के लिये सदन का कार्यकाल समाप्त होने की तारीख से छह महीने पहले से ही सरकार प्रायोजित विज्ञापनों पर प्रतिबंध लगाया जाए।

    फिलहाल उम्मीदवारों को नामांकन के दिन से चुनाव परिणाम आने तक अपने चुनावी खर्चों का लेखा-जोखा देना होता है, लेकिन इस अवधि को बढ़ाए जाने की ज़रूरत है। उम्मीदवारों अथवा उनके चुनाव एजेंटों से अधिसूचना जारी होने के दिन से परिणाम आने के दिन तक का चुनावी खर्चों का हिसाब मांगा जाना चाहिये।

    चुनाव खर्चों का ब्योरा नहीं देने वाले उम्मीदवारों को तीन साल के बजाय पाँच साल के लिये चुनाव लड़ने के अयोग्य ठहराए जाने की सिफारिश की गई। इससे ऐसे उम्मीदवार कम-से-कम अगला चुनाव नहीं लड़ सकेंगे।

    स्रोत : www.drishtiias.com

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    Mohammed 7 day ago
    4

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