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    खूब लड़ी मर्दानी वो तो झांसी वाली रानी थी lyrics

    Mohammed

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    (POEM) खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी... (Khoob Ladi Mardani Woh To Jhansi Wali Rani Thi..)

    (POEM) खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी... (Khoob Ladi Mardani Woh To Jhansi Wali Rani Thi..)

    (POEM)खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी...झाँसी की रानी सिंहासन हिल उठे राजवंशों ने भृकुटी तानी थी,

    बूढ़े भारत में आई फिर से नयी जवानी थी,

    गुमी हुई आज़ादी की कीमत सबने पहचानी थी,

    दूर फिरंगी को करने की सबने मन में ठानी थी।

    चमक उठी सन सत्तावन में, वह तलवार पुरानी थी,

    बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी,

    खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी।।

    कानपूर के नाना की, मुँहबोली बहन छबीली थी,

    लक्ष्मीबाई नाम, पिता की वह संतान अकेली थी,

    नाना के सँग पढ़ती थी वह, नाना के सँग खेली थी,

    बरछी ढाल, कृपाण, कटारी उसकी यही सहेली थी।

    वीर शिवाजी की गाथायें उसकी याद ज़बानी थी,

    बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी,

    खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी।।

    लक्ष्मी थी या दुर्गा थी वह स्वयं वीरता की अवतार,

    देख मराठे पुलकित होते उसकी तलवारों के वार,

    नकली युद्ध-व्यूह की रचना और खेलना खूब शिकार,

    सैन्य घेरना, दुर्ग तोड़ना ये थे उसके प्रिय खिलवार।

    महाराष्टर-कुल-देवी उसकी भी आराध्य भवानी थी,

    बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी,

    खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी।।

    हुई वीरता की वैभव के साथ सगाई झाँसी में,

    ब्याह हुआ रानी बन आई लक्ष्मीबाई झाँसी में,

    राजमहल में बजी बधाई खुशियाँ छाई झाँसी में,

    चित्रा ने अर्जुन को पाया, शिव से मिली भवानी थी,

    बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी,

    खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी।।

    उदित हुआ सौभाग्य, मुदित महलों में उजियाली छाई,

    किंतु कालगति चुपके-चुपके काली घटा घेर लाई,

    तीर चलाने वाले कर में उसे चूड़ियाँ कब भाई,

    रानी विधवा हुई, हाय! विधि को भी नहीं दया आई।

    निसंतान मरे राजाजी रानी शोक-समानी थी,

    बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी,

    खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी।।

    बुझा दीप झाँसी का तब डलहौज़ी मन में हरषाया,

    राज्य हड़प करने का उसने यह अच्छा अवसर पाया,

    फ़ौरन फौजें भेज दुर्ग पर अपना झंडा फहराया,

    लावारिस का वारिस बनकर ब्रिटिश राज्य झाँसी आया।

    अश्रुपूर्णा रानी ने देखा झाँसी हुई बिरानी थी,

    बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी,

    खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी।।

    अनुनय विनय नहीं सुनती है, विकट शासकों की माया,

    व्यापारी बन दया चाहता था जब यह भारत आया,

    डलहौज़ी ने पैर पसारे, अब तो पलट गई काया,

    राजाओं नव्वाबों को भी उसने पैरों ठुकराया।

    रानी दासी बनी, बनी यह दासी अब महरानी थी,

    बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी,

    खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी।।

    छिनी राजधानी दिल्ली की, लखनऊ छीना बातों-बात,

    कैद पेशवा था बिठुर में, हुआ नागपुर का भी घात,

    उदैपुर, तंजौर, सतारा, करनाटक की कौन बिसात?

    जबकि सिंध, पंजाब ब्रह्म पर अभी हुआ था वज्र-निपात।

    बंगाले, मद्रास आदि की भी तो वही कहानी थी,

    बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी,

    खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी।।

    रानी रोयीं रिनवासों में, बेगम ग़म से थीं बेज़ार,

    उनके गहने कपड़े बिकते थे कलकत्ते के बाज़ार,

    सरे आम नीलाम छापते थे अंग्रेज़ों के अखबार,

    'नागपूर के ज़ेवर ले लो लखनऊ के लो नौलख हार'।

    यों परदे की इज़्ज़त परदेशी के हाथ बिकानी थी,

    बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी,

    खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी।।

    कुटियों में भी विषम वेदना, महलों में आहत अपमान,

    वीर सैनिकों के मन में था अपने पुरखों का अभिमान,

    नाना धुंधूपंत पेशवा जुटा रहा था सब सामान,

    बहिन छबीली ने रण-चण्डी का कर दिया प्रकट आहवान।

    हुआ यज्ञ प्रारम्भ उन्हें तो सोई ज्योति जगानी थी,

    बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी,

    खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी।।

    महलों ने दी आग, झोंपड़ी ने ज्वाला सुलगाई थी,

    यह स्वतंत्रता की चिनगारी अंतरतम से आई थी,

    झाँसी चेती, दिल्ली चेती, लखनऊ लपटें छाई थी,

    मेरठ, कानपूर, पटना ने भारी धूम मचाई थी,

    जबलपूर, कोल्हापूर में भी कुछ हलचल उकसानी थी,

    बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी,

    खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी।।

    इस स्वतंत्रता महायज्ञ में कई वीरवर आए काम,

    नाना धुंधूपंत, ताँतिया, चतुर अज़ीमुल्ला सरनाम,

    अहमदशाह मौलवी, ठाकुर कुँवरसिंह सैनिक अभिराम,

    भारत के इतिहास गगन में अमर रहेंगे जिनके नाम।

    लेकिन आज जुर्म कहलाती उनकी जो कुरबानी थी,

    बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी,

    खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी।।

    इनकी गाथा छोड़, चले हम झाँसी के मैदानों में,

    जहाँ खड़ी है लक्ष्मीबाई मर्द बनी मर्दानों में,

    लेफ्टिनेंट वाकर आ पहुँचा, आगे बड़ा जवानों में,

    रानी ने तलवार खींच ली, हुया द्वन्द्ध असमानों में।

    ज़ख्मी होकर वाकर भागा, उसे अजब हैरानी थी,

    बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी,

    खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी।।

    रानी बढ़ी कालपी आई, कर सौ मील निरंतर पार,

    घोड़ा थक कर गिरा भूमि पर गया स्वर्ग तत्काल सिधार,

    यमुना तट पर अंग्रेज़ों ने फिर खाई रानी से हार,

    विजयी रानी आगे चल दी, किया ग्वालियर पर अधिकार।

    अंग्रेज़ों के मित्र सिंधिया ने छोड़ी रजधानी थी,

    बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी,

    खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी।।

    विजय मिली, पर अंग्रेज़ों की फिर सेना घिर आई थी,

    अबके जनरल स्मिथ सम्मुख था, उसने मुहँ की खाई थी,

    काना और मंदरा सखियाँ रानी के संग आई थी,

    युद्ध श्रेत्र में उन दोनों ने भारी मार मचाई थी।

    पर पीछे ह्यूरोज़ आ गया, हाय! घिरी अब रानी थी,

    बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी,

    खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी।।

    तो भी रानी मार काट कर चलती बनी सैन्य के पार,

    किन्तु सामने नाला आया, था वह संकट विषम अपार,

    स्रोत : bundelkhand.in

    Lyrics बुंदेले हरबोलों के मुख हमने सुनी कहानी खूब लड़ी मरदानी वह थी, झाँसी वाली रानी khoob ladi mardaani wah thi Jhansi wali rani sung by Madhuri Mishra

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    बुंदेले हरबोलों के मुख हमने सुनी कहानी

    खूब लड़ी मरदानी वह थी, झाँसी वाली रानी

    बुंदेले हरबोलों के मुख हमने सुनी कहानी

    खूब लड़ी मरदानी वह थी, झाँसी वाली रानी

    इस समाधि में छिपी हुई है, एक राख की ढेरी

    जल कर जिसने स्वतंत्रता की, दिव्य आरती फेरी

    यह समाधि यह लघु समाधि है, झाँसी की रानी की

    अंतिम लीलास्थली यही है, लक्ष्मी मरदानी की

    यहीं कहीं पर बिखर गई वह, भग्न-विजय-माला-सी

    उसके फूल यहाँ संचित हैं, है यह स्मृति शाला-सी

    सहे वार पर वार अंत तक, लड़ी वीर बाला-सी

    आहुति-सी गिर चढ़ी चिता पर, चमक उठी ज्वाला-सी

    बढ़ जाता है मान वीर का, रण में बलि होने से

    मूल्यवती होती सोने की भस्म, यथा सोने से

    रानी से भी अधिक हमे अब, यह समाधि है प्यारी

    यहाँ निहित है स्वतंत्रता की, आशा की चिनगारी

    जाओ रानी याद करेंगे ये कृतज्ञ भारत वासी

    तेरा यह बलिदान जगावेगा स्वतन्त्रता अविनाशी

    होवे चुप इतिहास लगे सच्चाई को चाहे फ़ासी

    तेरा स्मारक तू ही होगी,तू खुद अमिट निशानी

    बुंदेले हरबोलों के मुख हमने सुनी कहानी

    खूब लड़ी मरदानी वह थी, झाँसी वाली रानी

    झांसी वाली रानी...झांसी वाली रानी.....

    गायिका - माधुरी मिश्रा

    संगीत - माधुरी मिश्रा

    गीत - सुभद्रा कुमारी चौहान

    khoob ladi mardaani wah thi Jhansi wali rani sung by Madhuri Mishra

    bundele harabolon ke mukh hamane sunee kahaanee

    khoob lada़ee maradaanee vah thee, jhaansee vaalee raanee

    is samaadhi men chhipee huee hai, ek raakh kee dheree

    jal kar jisane svatantrata kee, divy aaratee pheree

    yah samaadhi yah laghu samaadhi hai, jhaansee kee raanee kee

    antim leelaasthalee yahee hai, lakshmee maradaanee kee

    yaheen kaheen par bikhar gaee vah, bhagna-vijaya-maalaa-see

    usake phool yahaan sanchit hain, hai yah smriti shaalaa-see

    sahe vaar par vaar ant tak, lada़ee veer baalaa-see

    aahuti-see gir chadha़ee chita par, chamak uthee jvaalaa-see

    badha़ jaata hai maan veer ka, ran men bali hone se

    moolyavatee hotee sone kee bhasm, yatha sone se

    raanee se bhee adhik hame ab, yah samaadhi hai pyaaree

    yahaan nihit hai svatantrata kee, aasha kee chinagaaree

    jaao raanee yaad karenge ye kritajn bhaarat vaasee

    tera yah balidaan jagaavega svatantrata avinaashee

    hove chup itihaas lage sachchaaee ko chaahe pha़aasee

    tera smaarak too hee hogee,too khud amit nishaanee

    bundele harabolon ke mukh hamane sunee kahaanee

    khoob lada़ee maradaanee vah thee, jhaansee vaalee raanee

    jhaansee vaalee raanee...jhaansee vaalee raanee.....

    gaayika - maadhuree mishraa

    sangeet - maadhuree mishraa

    geet - subhadra kumaaree chauhaana

    स्रोत : www.yugalsarkar.com

    खूब लड़ी मर्दानी वह थी झांसी वाली रानी लिरिक्स Khoob Ladi Mardani Vah Thi Jhansi Wali Raani Lyrics

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    बुंदेले हरबोलों के मुख हमने सुनी कहानी |

    खूब लड़ी मरदानी वह थी, झाँसी वाली रानी ||

    इस समाधि में छिपी हुई है, एक राख की ढेरी |

    जल कर जिसने स्वतंत्रता की, दिव्य आरती फेरी ||

    यह समाधि यह लघु समाधि है, झाँसी की रानी की |

    अंतिम लीलास्थली यही है, लक्ष्मी मरदानी की ||

    यहीं कहीं पर बिखर गई वह, भग्न-विजय-माला-सी |

    उसके फूल यहाँ संचित हैं, है यह स्मृति शाला-सी |

    सहे वार पर वार अंत तक, लड़ी वीर बाला-सी |

    आहुति-सी गिर चढ़ी चिता पर, चमक उठी ज्वाला-सी |

    बढ़ जाता है मान वीर का, रण में बलि होने से |

    मूल्यवती होती सोने की भस्म, यथा सोने से ||

    रानी से भी अधिक हमे अब, यह समाधि है प्यारी |

    यहाँ निहित है स्वतंत्रता की, आशा की चिनगारी ||

    जाओ रानी याद करेंगे ये कृतज्ञ भारत वासी |

    तेरा यह बलिदान जगावेगा स्वतन्त्रता अविनाशी |

    होवे चुप इतिहास लगे सच्चाई को चाहे फ़ासी |

    तेरा स्मारक तू ही होगी,तू खुद अमिट निशानी |

    बुंदेले हरबोलों के मुख हमने सुनी कहानी |

    खूब लड़ी मरदानी वह थी, झाँसी वाली रानी ||

    झांसी वाली रानी...झांसी वाली रानी.....

    देशभक्ति गीत से अभिप्राय : देशभक्ति गीत किसी देश की अस्मिता होते हैं जिन के माध्यम से राष्ट्र को सर्वोपरि स्थान दिया जाता है। इन गीतों की प्रमुखता होती है की इनमे राष्ट्र रस और देशभक्ति की भावना जाग्रत करने के लिए रचा जाता है। राष्ट्रिय पर्व, राजनैतिक कारकर्मों, अन्यदेशों में देश का प्रतिनिधित्व जैसे ओलम्पिक गेम्स और अन्य खेल प्रतियोगिताओ में इसे बजाया जाता है ये राष्ट्र गान के बाद बजाया जाता है। कवी प्रदीप, सुमित्रानंदन पंत, गिरिजाकुमार माथुर के देशभक्ति गीत काफी प्रचलित हैं। स्वतंत्रता आंदोलन के समय से ही  देशभक्ति गीत और कविताओं ने लोगों में जोश भरा है।

    हिंदी सिनेमा ने देशभक्ति फिल्मों के माध्यम से इस क्षेत्र में विशेष कार्य किया है। टीवी का भी इस क्षेत्र में अहम् योगदान दिया है। दूरदर्शन के समय देशभक्ति गीत, सांप्रदायिक एकता को प्रदर्शित करने के लिए चलाये जाते थे जो लोगों की जुबान पर रहते थे। जैसे सुन सुन मेरे मुन्ने सुन, प्यार की गंगा बहे, देश में एक रहे। इसके साथ ही "मिले सुर मेरा तुम्हारा", "बजे सरगम हर तरफ से", "हिन्द देश के निवासी सब जन एक हैं", "हम सब एक हैं ", "झंडा ऊँचा रहे हमारा" आदि गीतों ने एक अमित छाप छोड़ी है।

    Also read :कीर्तन की हैं रात बाबा आज थाने आनो हैं keertan kee hain raat baaba aaj thaane aano hain राजस्थानी गाना लिरिक्स | मारवाड़ी सांग लिरिक्स हिन्दी

    सिनेमा ने देशभक्ति गीतों को एक नया आयाम दिया है। १९४८ में फिल्म शहीद ने लोगों में देशभक्ति की भावना को जाग्रत कर दिया था। फिल्म जगत से जुड़े कवी प्रदीप ने "ए मेरे वतन के लोगों " की रहना चीन युद्ध के बाद की गयी। कवी प्रदीप की इस रचना को सर्वप्रथम लता मगेशकर ने गाय जिसे सुन कर जवाहर लाल नेहरू के आखों में पानी आ गया था। आज भी स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस के अवसर पर यदि यह गीत ना बजाया जाय तो कुछ अधूरा सा रहता है।

    १९६७ में प्रदर्शित उपकार फिल्म का एक गीत जो काफी प्रसिद्ध हुआ वो था "  मेरे देश की धरती, सोना उगले, उगले हिरे मोती " लोगों की जुबान पर चढ़ गया था और आज भी विशेष अवसरों पर इसे प्रदर्शित किया जाता है जिसने पुरे देश को एक सूत्र में बांधने का प्रयास किया। इसके अलावा "जहाँ डाल डाल पर सोने की चिड़िया करे बसेरा ", "अपनी आजादी को हम हरगिज मिटा सकते नहीं ", "दे दी हमें आजादी बिना खडग बिना धाल , मेरा रंग दे बसंती चोला आदि गीतों ने देशभक्ति  की भावना को लोगों में प्रसारित करने में अहम् भूमिका  निभाई है।

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    Bundele Harabolon Ke Mukh Hamane Sunee Kahaanee |

    Khoob Ladee Maradaanee Vah Thee, Jhaansee Vaalee Raanee ||

    Is Samaadhi Mein Chhipee Huee Hai, Ek Raakh Kee Dheree |

    Jal Kar Jisane Svatantrata Kee, Divy Aaratee Pheree ||

    Yah Samaadhi Yah Laghu Samaadhi Hai, Jhaansee Kee Raanee Kee |

    Antim Leelaasthalee Yahee Hai, Lakshmee Maradaanee Kee ||

    Yaheen Kaheen Par Bikhar Gaee Vah, Bhagn-vijay-maala-see |

    Usake Phool Yahaan Sanchit Hain, Hai Yah Smrti Shaala-see |

    Sahe Vaar Par Vaar Ant Tak, Ladee Veer Baala-see |

    Aahuti-see Gir Chadhee Chita Par, Chamak Uthee Jvaala-see |

    Badh Jaata Hai Maan Veer Ka, Ran Mein Bali Hone Se |

    Moolyavatee Hotee Sone Kee Bhasm, Yatha Sone Se ||

    Raanee Se Bhee Adhik Hame Ab, Yah Samaadhi Hai Pyaaree |

    Yahaan Nihit Hai Svatantrata Kee, Aasha Kee Chinagaaree ||

    Jao Raanee Yaad Karenge Ye Krtagy Bhaarat Vaasee |

    Tera Yah Balidaan Jagaavega Svatantrata Avinaashee |

    Hove Chup Itihaas Lage Sachchaee Ko Chaahe Faasee |

    स्रोत : lyricspandits.blogspot.com

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    Mohammed 8 day ago
    4

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