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    antriksh yan mein chandrama tak jane aur prithvi per laut aane wala pahla janwar kaun tha

    Mohammed

    Guys, does anyone know the answer?

    get antriksh yan mein chandrama tak jane aur prithvi per laut aane wala pahla janwar kaun tha from screen.

    लाइका

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    लाइका

    मुक्त ज्ञानकोश विकिपीडिया से

    नेविगेशन पर जाएँ खोज पर जाएँ लाइका

    1959 से लाइका के साथ रोमानियाई स्टैम्प। कैप्शन में लिखा है "लाइका, कोसमोस (अंतरिक्ष) में पहला यात्री"

    अन्य नाम Kudryavka प्रजाती नस्ल मोंगरेल लिंग मादा जन्म लाइका Лайка 1954 मास्को, सोवियत संघ

    मृत्यु 3 नवम्बर 1957 (आय 3)

    स्पूतनिक 2, निम्न पृथ्वी की कक्षा]] मे

    सक्रिय वर्ष 1957

    ख्याति का कारण पृथ्वी की परिक्रमा करने वाला पहला जानवर

    मालिक सोवियत अंतरिक्ष कार्यक्रम

    वज़न 5 किलोग्राम (11 पौंड)

    लाइका ( रूसी: ; 1954 - 3 नवंबर 1957) एक सोवियत अंतरिक्ष कुत्ता था जो अंतरिक्ष में पहले जानवरों में से एक बन गया, और पृथ्वी की परिक्रमा करने वाला यह पहला जानवर था। मॉस्को की सड़कों से भटकने वाली लाइका को सोवियत अंतरिक्ष यान स्पुतनिक 2 के रहने के लिए चुना गया था जिसे 3 नवंबर 1957 को बाहरी अंतरिक्ष में लॉन्च किया गया था।

    लाइका के मिशन के समय जीवित प्राणियों पर अंतरिक्ष उड़ान के प्रभाव के बारे में बहुत कम जानकारी थी, और डे-ऑर्बिट की तकनीक तब तक विकसित नहीं हुई थी। इसलिए लाइका के जीवित रहने की उम्मीद कभी नहीं की गई थी। कुछ वैज्ञानिकों का मानना था कि मनुष्य प्रक्षेपण या अंतरिक्ष की स्थितियों से बचने में असमर्थ होगा, इसलिए इंजीनियरों ने जानवरों की उड़ान को भविष्य में होने वाले मानव मिशन के लिए आवश्यक अग्रदूत के रूप देखा। यह प्रयोग यह साबित करने के लिए किया गया था कि एक जीवित यात्री को कक्षा में लॉन्च किया जा सकता है और वह एक माइक्रो-ग्रैविटी पर्यावरण को सहन कर सकता है। इससे भविष्य की मानव अंतरिक्ष यात्रा के लिए मार्ग प्रशस्त होता है और वैज्ञानिकों को इस बात पर पहली बार कोई सूचना प्रदान करता है कि जीवित प्राणी स्पेसफ्लाइट वातावरण में कैसे प्रतिक्रिया करते हैं।

    लाइका की अतिताप (ओवर्हीटिंग) से घंटे के भीतर मृत्यु हो गई, संभवतः केंद्रीय आर-7 निर्वाहक की पेलोड से अलग होने में विफलता के कारण। उसकी मृत्यु का सही कारण और समय 2002 तक सार्वजनिक नहीं किया गया था; इसके बजाय, यह व्यापक रूप से बताया गया था कि जब उसकी ऑक्सीजन छह दिन की थी, तब उसकी मृत्यु हो गई थी, जैसा कि सोवियत सरकार ने शुरू में दावा किया था, वह ऑक्सीजन की कमी से पहले से ही मर चुकी थी।

    11 अप्रैल 2008 को, रूसी अधिकारियों ने लाइका के लिए एक स्मारक का अनावरण किया। उसके सम्मान में मास्को में एक छोटा सा स्मारक उस सैन्य अनुसंधान सुविधा के पास बनाया गया था, जहाँ लाइका को अंतरिक्ष में जाने के लिए तैयार किया था। इसने एक रॉकेट के ऊपर खड़े एक कुत्ते को चित्रित किया। वह में भी दिखाई देती है।[1][2][3][4] [5]

    अनुक्रम

    1 संदर्भ 1.1 ग्रन्थसूची 2 आगे की पढाई 3 बाहरी कड़ियाँ

    संदर्भ[संपादित करें]

    ↑ "Message from the First Dog in Space Received 45 Years Too Late", Dogs in the News, 3 November 2002, मूल से 8 January 2006 को पुरालेखित, अभिगमन तिथि 4 October 2006

    ↑ LePage, Andrew J. (1997), "Sputnik 2: The First Animal in Orbit", मूल से 24 सितंबर 2015 को पुरालेखित, अभिगमन तिथि 26 September 2006

    ↑ Zak, Anatoly (3 November 1999), "The True Story of Laika the Dog", मूल से 20 February 2006 को पुरालेखित, अभिगमन तिथि 28 September 2006

    ↑ Whitehouse, David (28 October 2002), , BBC, मूल से 5 September 2015 को पुरालेखित, अभिगमन तिथि 26 September 2006

    ↑ Beischer, DE; Fregly, AR (1962), "Animals and man in space. A chronology and annotated bibliography through the year 1960", , ONR TR ACR-64 (AD0272581), मूल से 11 अगस्त 2015 को पुरालेखित, अभिगमन तिथि 14 June 2011

    ग्रन्थसूची[संपादित करें]

    Dickson, Paul (2009), , Bloomsbury Publishing USA, आई॰ऍस॰बी॰ऍन॰ 978-0-8027-1804-4

    Siddiqi, Asif. A. (2000), , NASA SP-2000-4408. Part 1 (page 1-500) Archived 2008-09-16 at the Wayback Machine, Part 2 (page 501-1011) Archived 2019-07-14 at the Wayback Machine.

    आगे की पढाई[संपादित करें]

    एंगलिस, सारा और उत्तरले, कॉलिन। डॉक में विज्ञान: वह आदमी जिसने अंतरिक्ष कुत्तों को प्रशिक्षित किया । 28 जनवरी, 2005 को लिया गया।

    डब, क्रिस और बर्गेस, कॉलिन । अंतरिक्ष में पशु: अनुसंधान रॉकेट से अंतरिक्ष शटल, 2007 तक।

    बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]

    स्पुतनिक मिशनों का इतिहास

    अंतरिक्ष यात्री पर स्पुतनिक 2

    श्रेणियाँ: CS1: long volume valueArticles with 'species' microformats

    स्रोत : hi.wikipedia.org

    अन्तरिक्ष यान में चंद्रमा तक जाने और पृथ्वी पर लौट आने वाला जानवर कौन था ?

    अन्तरिक्ष यान में चंद्रमा तक जाने और पृथ्वी पर लौट आने वाला पहला जानवर एक कुत्ता था जो लाइका नाम से पृथ्वी की परिक्रमा करने वाला पहला जानवर के रूप में विख्यात है

    अन्तरिक्ष यान में चंद्रमा तक जाने और पृथ्वी पर लौट आने वाला जानवर कौन था ?

    Rakesh Kumar September 21, 2022 1 min read Write a Comment

    on अन्तरिक्ष यान में चंद्रमा तक जाने और पृथ्वी पर लौट आने वाला जानवर कौन था ?

    हम सब जानते है कि मनुष्य आधुनिक टेक्नोलॉजी के मदद से चंद्रमा तक पहुँच चूका है पर आज भी हम जैसे बहुत से लोगों के मन में ये सवाल रहता है कि आखिर वो कौन था जो सबसे पहले अन्तरिक्ष यान के दौरान चंद्रमा पर पहुंचा और फिर पृथ्वी पर वापस भी आ गया. इसका एक सिंपल सा आंसर है कि सबसे पहले नासा के द्वारा चंद्रमा पर एक जानवर को भेजा गया था जो सही सलामत पृथ्वी पर लौटा.

    सोचने योग्य बात है कि कैसा माहौल होगा उस वक्त जब पहली बार कोई जानवर अन्तरिक्ष से सही सलामत लौट आया. ये विश्व अब टेक्नोलॉजी का है, आज के समय हर चीज संभव है पर कुछ साल पहले इतनी डेवलपमेंट नहीं हुई थी फिर भी वैज्ञानिकों ने चंद्रमा पर एक जिव को भेजकर सबसे बड़ी सफलता प्राप्त की. दोस्त आज हम उस जानवर के बारे में चर्चा करेंगे जिन्हें वैज्ञानिको द्वारा चंद्रमा पर भेजा गया था. तो आइए हम इस टॉपिक को विस्तार से पढ़े –

    Post Contents

    पहली बार अन्तरिक्ष यान में चंद्रमा पर जाने और पृथ्वी पर लौट आने वाले जानवर

    सन 1957 में लाइका मिशन के दौरान पहली बार अन्तरिक्ष यान में चंद्रमा पर वैज्ञानिको द्वारा भेजे जाने वाला जानवर एक मादा कुत्ता था.  मॉस्को की सड़कों से भटकने वाली लाइका को 3 नवंबर 1957 को अन्तरिक्ष यान के लिए भेजा गया और वह पूरी पृथ्वी की परिक्रमा करके वापस लौटा था . इसलिए उस कुत्ते को (जिसे हम लाइका के नाम से जानते है) पृथ्वी की परिक्रमा करने वाला पहला जानवर कहा जाता है.

    दरअसल उस समय कोई भी चंद्रमा या फिर अन्तरिक्ष के माइक्रो-ग्रैविटी से ज्यादा परिचित नहीं थे. शायद इसीलिए वैज्ञानिको ने सबसे पहले एक कुत्ते को भेजा ताकि ये पता लगाया जा सके की वहां पर कोई भी जीव कैसा सर्वाइव करता है. इससे ये फायदा हुआ की हमें पता चल गया की हम मनुष्य भी ओक्सिजन कि मदद से अन्तरिक्ष में जा सकते है.

    पर हैरानी कि बात ये है कि वह कुत्ता अन्तरिक्ष यान में चंद्रमा पर जाकर पृथ्वी पर तो सही सलामत वापस आ गया लेकिन कुछ ही घंटो के बाद उसकी मृत्यु हो गयी. इस बात की खुलासा विकिपीडिया कि इस पेज में अच्छी तरह से की गयी है.

    आगे चलकर नील एल्डन आर्मस्ट्रांग (जो एक अमेरिकी खगोलयात्री थे) पहली बार किसी मनुष्य के चंद्रमा पर अपना कदम रखा था और पृथ्वी पर सही सलामत वापस भी आया था. और यह मिशन नासा के द्वारा तय किया गया था जो काफी सफल रहा, मिशन के दौरान चंद्रमा से कई सारे पिक्चर भी शूट किये गए थे जिसमे उन्होंने अमेरिकी झंडा लहराया था.

    लाइका : पृथ्वी की परिक्रमा करने वाला पहला जानवर

    अन्य नाम Kudryavka प्रजाति

    Canis lupus familiaris

    नस्ल मोंगरेल लिंग मादा मृत्यु 3 नवंबर 1957

    ख्याति का कारण पृथ्वी की परिक्रमा करने वाला पहला जानवर

    वजन 5 किलोग्राम (11 पौंड)

    अंतिम शब्द

    फाइनली आज आपने जाना कि अन्तरिक्ष यान में चंद्रमा जाने और पृथ्वी पर लौट आने वाला पहला जानवर कौन था ? जिसमे हमने आपको बताया कि वह एक कुत्ता था जिसे पहली बार अन्तरिक्ष में भेजा गया था. जो लाइका के नाम से थ्वी की परिक्रमा करने वाला पहला जानवर के रूप में विख्यात हुआ.

    दोस्त, अगर मैं सच बताऊँ तो यह बात मुझे भी पता नहीं था फिर मैंने रिसर्च करना शुरू किया उसी दौरान मुझे विकिपीडिया का ये पेज मिला जिसमे इस जानवर की खुलासा गयी थी . आशा करता हूँ आपको ये इनफार्मेशन पसंद आई होगी, अगर आपको लगता है इस आर्टिकल में सुधार होने चाहिए तो प्लीज हमें कमेंट करे. हम आपकी सलाह पर विचार करेंगे. धन्यवाद !!

    स्रोत : www.o4opinion.com

    laika the first dog in space, लाइका डॉगी: अंतरिक्ष में पहला जानवर, पढ़ें पूरी रोचक कहानी

    अंतरिक्ष में अगर आज इंसान जा रहा है तो इसका बहुत श्रेय लाइका नाम की एक डॉगी को जाता है। उसने हमारे लिए कुर्बानी दी, तब जाकर हमारा अंतरिक्ष में जाना संभव हो पाया।

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    लाइका डॉगी: अंतरिक्ष में पहला जानवर, पढ़ें पूरी रोचक कहानी

    नवभारतटाइम्स.कॉम | Updated: 3 Nov 2018, 3:02 pm

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    अंतरिक्ष में अगर आज इंसान जा रहा है तो इसका बहुत श्रेय लाइका नाम की एक डॉगी को जाता है। उसने हमारे लिए कुर्बानी दी, तब जाकर हमारा अंतरिक्ष में जाना संभव हो पाया।

    सांकेतिक तस्वीर

    हाइलाइट्स

    3 नवंबर, 1947 को लाइका नाम की डॉगी को स्पूतनिक-2 स्पेसक्राफ्ट में डालकर अंतरिक्ष भेजा गया था।

    लाइका ने स्पूतनिक-2 में धरती के कक्ष का चक्कर भी लगाया था।

    स्पेसक्राफ्ट का तापमान सामान्य से ज्यादा हो जाने के कारण लाइका की मौत हो गई थी।

    स्पूतनिक-2 पांच महीने बाद 14 अप्रैल, 1958 को धरती पर लौटते समय टुकड़ों में बंट गया।

    3 नवंबर अंतरिक्ष के इतिहास में अहम दिन है। इसी दिन यानी 3 नवंबर, 1957 को रूस ने स्पूतनिक-2 नाम के अंतरिक्षयान में लाइका नाम की एक डॉगी को अंतरिक्ष भेजा था। स्पूतनिक-2 में बैठकर उसने धरती के चक्कर भी लगाए थे। लाइका को एक तरह से परीक्षण के लिए भेजा गया था। इस मिशन का एक मकसद यह जानना था कि अंतरिक्ष में किसी इंसान को भेजना कितना सुरक्षित है और वहां की स्थिति कैसी है। दुखद बात यह है कि लाइका ने इस स्पेस मिशन में अहम भूमिका निभाई लेकिन वह धरती पर जीवित वापस नहीं आ सकी। आइए इस मिशन और लाइका से जुड़ीं कुछ खास बातें हम जानते हैं...

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    मानवता के लिए बलिदान लेकिन सूइसाइड मिशनयह एक ऐसा सूइसाइड मिशन था जो मानवता के लिए बड़ा बलिदान साबित हुआ। इसे सूइसाइड मिशन इसलिए कह सकते हैं क्योंकि मिशन में शामिल वैज्ञानिकों को अंदाजा था कि लाइका का धरती पर जिंदा वापस लौटना संभव नहीं है। उन्होंने जो अंतरिक्षयान बनाया था, उसमें तकनीकी खामी थी। तकनीकी रूप से वह रॉकेट इतना सक्षम नहीं था कि धरती पर वापस लौट सके। दरअसल सोवियत लीडर निकिता ख्रुशचोफ की डिमांड पर जल्दबाजी में रॉकेट को तैयार किया गया था। जल्दबाजी की वजह से उसको तकनीकी रूप से ज्यादा सक्षम नहीं बनाया जा सका था।

    पहले जो योजना बनाई गई थी, उसमें पूरा इंतजाम करना था ताकि लाइका वापस धरती पर जिंदा लौट सके। ज्यादा अडवांस्ड स्पुतनिक-2 के निर्माण पर काम चल रहा था लेकिन दिसंबर से पहले उसको तैयार करना संभव नहीं था। ख्रोशचोफ ने इस मिशन को प्रौपेगैंडा के तौर पर देखा। वह चाहते थे कि बोल्शेविक क्रांति की 40वीं जयंती पर मिशन को लॉन्च करना ज्यादा फायदेमंद रहेगा।

    अंतरिक्ष में और भी जानवरवैसे दावा तो किया जाता है कि लाइका ही पहला जानवर था जिसे अंतरिक्ष में भेजा गया लेकिन यह पूरी तरह सही नहीं है। हां, यह जरूर सही बात है कि लाइका पहला जानवर थी जो धरती के कक्ष में पहुंची। पहले जिन जानवरों को भेजा गया था, उनको धरती के कक्ष में नहीं भेजा गया था।

    1947 में काफी ऊंचाई पर रेडिएशन के प्रभाव का अध्ययन करने के लिए V2 रॉकेट में फ्रूट फ्लाइज को भेजा गया था।

    अगले साल उसी विमान में रीसस प्रजाति के बंदर को भेजा गया था।

    सोवियत रूस ने अल्बिना नाम की एक डॉगी को भी भेजा था। वह कक्ष के आधे रास्ते तक जाकर लौट आई थी। वह लाइका की बैकअप थी। कुछ स्रोतों का कहना है कि स्पूतनिक-2 में पहले अल्बिना को ही भेजनी की योजना थी लेकिन लाइका को उसको शांत स्वाभाव के कारण चुना गया था।

    छोटे-छोटे पिंजरों में दिया गया प्रशिक्षणस्पूतनिक-2 का साइज एक वॉशिंग मशीन से थोड़ा बड़ा था। लाइका को स्पूतनिक-2 के अंदर खुद को जीवित रखने के लिए प्रशिक्षण देने के मकसद से उसे छोटे-छोटे पिंजरों में प्रशिक्षण दिया गया।प्यार के साथ विदाईलाइका को अंतरिक्ष मिशन पर जाने से पहले पूरा प्यार दिया गया। उसे अपने घर पर लाया गया ताकि वह अपने बच्चों के साथ खेल सके। मिशन पर रवाना होने से पहले टीम ने उसको गुडबाई कहा और उसके नाक को चूमा।

    रवाना होने से पहले भयभीत थी लाइकाअंतरिक्ष में स्पूतनिक-2 की लॉन्चिंग के समय लाइका बहुत डरी हुई थी। उसके दिल की धड़कन और सांसें सामान्य से तीन से चार गुना ज्यादा तेज चलने लगीं। उसे समझ में नहीं आ रहा था कि क्या हो रहा है। करीब तीन घंटे बाद उसकी हालत सामान्य पर लौटी।मौत का असल कारण लोगों से छिपायालाइका की मौत का असल कारण लोगों से छिपाया गया था। लोगों के बीच इसको लेकर तरह-तरह की अफवाहें फैल गई थीं। कुछ कहते थे कि लाइका ने उस जहर को खा लिया था जिसे उसको बेहोश करने के लिए तैयार किया गया था। कुछ लोग कहते थे कि दम घुटने से उसकी मौत हुई तो कुछ का कहना था कि बैट्री फेल होना उसकी मौत का कारण बना।

    असल कारणअसल कारण 2002 में सामने आया जब सोवियत वैज्ञानिक दिमित्री मालाशेनकोव ने वर्ल्ड स्पेस कांग्रेस में सच्चाई से पर्दा हटाया। अंतरिक्षयान का तापमान बढ़ने के कारण उड़ान के चौथे सर्किट के दौरान सात घंटे के अंदर लाइका की मौत हो गई थी। चूंकि अंतरिक्षयान को जल्दी में बनाया गया था इसलिए उसमें तापमान नियंत्रण प्रणाली सही से लगाई नहीं जा सकी थी जिस वजह से सिस्टम फेल हो गया। स्पूतनिक-2 गर्म से गर्म होता गया और 100 डिग्री फारेनहाइट तापमान को पार कर गया। अंतरिक्षयान के अंदर का तापमान काफी बढ़ने के बाद एक बार फिर लाइका भयभीत हो गई और फिर वैज्ञानिकों ने उसकी धड़कन को तेज से तेज होते सुना। अंत में उन्होंने उसकी धड़कन को शांत होते सुना।

    स्रोत : navbharattimes.indiatimes.com

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    Mohammed 3 day ago
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    Guys, does anyone know the answer?

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