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    arthik sahyog aur vikas sangathan ke anusar kaun sa desh duniya ka sabse adhik shikshit desh hai

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    सभी के लिए शिक्षा

    यूनिसेफ भारत में सभी बच्चों को उच्च कोटि और समावेशी शिक्षा दिलाने और सशक्त बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।

    कार्यक्रम

    सभी के लिए शिक्षा

    यूनिसेफ भारत में सभी बच्चों को उच्च कोटि और समावेशी शिक्षा दिलाने और सशक्त बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।

    UNICEF/UN0238886/Vishwanathan

    में उपलब्ध: English हिंदी

    भारत में सामाजिक असमानता के स्तर के बारे में सब जानते है, और स्कूल एवं कक्षा में भी यह असमानता अध्यापकों तथा विद्यार्थियों द्वारा लाई जाती है। भाषा, जाति, धर्म, लिंग, स्थान, संस्कृति और रिवाज़ जैसे सामाजिक अंतर के पक्षपात पीढ़ी दर पीढ़ी अपनाए जाते हैं।

    बच्चे का लिंग, आर्थिक वर्ग, स्थान और जातीय पहचान काफी हद तक यह पहचान करवा देते हैं कि बच्चा किस तरह के स्कूल में पढ़ेगा, स्कूल में उसे किस तरह के अनुभव मिलेंगे और शिक्षा प्राप्त करके वे क्या लाभ प्राप्त कर सकेगा। आज के समय में जब कक्षाओं में विविध परिवेशों से आने वाले विद्यार्थियों की संख्या अधिक है और इसलिए यह अत्यंत आवश्यक हैकि भेदभाव भूल कर, प्रत्येक बच्चे को समान शिक्षा देने की ज़िम्मेदारी उठाई जाए।

    औपचारिक स्कूली शिक्षा में समान, गुणवत्तापरक शिक्षा प्रदान करने के लिए समानता और उत्कृष्टता सुनिश्चित करनाकिसी देश की शिक्षा प्रणाली का सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा होता है, जिसमें अध्यापक – शिक्षा की प्रक्रिया का मुख्य सुविधादाता – किसी बच्चे की स्कूली शिक्षा से आरंभ हुई शिक्षा यात्रा को एक आकार देने में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका अदा करता है।

    पिछले वर्षों में, भारत में इस बात को लेकर जागरुकता बढ़ी है कि सभी तरह की सामाजिक स्थिति वाले बच्चों को अच्छी शिक्षा मिले। ऐसा बालिकाओंऔर विशेषकर अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों, दिव्यांग, भाषायी, जातीय और धार्मिक अल्पसंख्यक समूहों के बालक और बालिकाओं दोनों के मामले में है। भारत में लिंग असमानता के फलस्वरूप शिक्षा में असमान अवसर हैं, और जबकि इससे दोनों लिंगों के बच्चों पर प्रभाव पड़ता है, आंकड़ों के आधार पर बालिकाओं के मामले में सर्वाधिक अलाभकारी स्थिति है। बालकों के तुलना में बालिकाएं अधिक संख्या में स्कूल से निकल जाती हैं । ऐसा इसलिए है कि उन्हें पारंपरिक रूप से घरेलू कामकाज में हाथ बंटाना पड़ता है, उनका स्कूल तक जाना असुरक्षित समझा जाता है और उनकी माहवारी के समय स्कूलों में उनके लिए स्वच्छता आदि की सुविधाएं कम होती हैं। महिलाओं के प्रति लिंग संबंधी रूढ़िवादी धारणाओं के कारण उन्हें घर पर रहने को कहा जाता है औरफलस्वरूप बालिकाओंको स्कूल से निकाल लिया जाता है।

    प्राथमिकऔरमाध्यमिक शिक्षा में लैंगिक अंतर को दूर करने वाले मुद्दों पर यूनिसेफसरकार और भागीदारों के साथ काम करता है। वह यह भी सुनिश्चित करना चाहता है कि सभी बच्चे अपनी प्राथमिक शिक्षा पूरी करें, औरबालिकाओंऔरबालकों को अच्छी शिक्षा के समान अवसर मिलें।

    हम स्कूल छोड़ चुके बालिकाओंऔरबालकों को शिक्षा प्राप्त करने के लिए लिंग अनुसार तकनीकी सहायता प्रदान करते हैं,और लिंग अनुकूल शैक्षिक पाठ्यक्रम और अध्यापन को  बढ़ावा देते हैं । उदाहरण के लिए, स्कूल छोड़ चुके बालिकाओंऔरबालकों की पहचान के लिए नए तरीके इस्तमाल किये जा रहे हैं, पाठ्य पुस्तकों की जांच करके उन्हें ठीक किया जा रहा है ताकि उनकी भाषा, छवियां और संदेश लिंग भेद को बनाएं न रख सकें।

    यूनिसेफ द्वारा लैंगिक समानतातथा समावेशन औरउसके अपनाने को अध्यापकों तथा बड़े स्तर पर समाज के प्रशिक्षण कार्यक्रमों को दो सबसे महत्वपूर्ण पहलू माने जाते हैं। समाज के लिए प्रशिक्षण यह सुनिश्चित करने का प्रयास करता है कि किसी स्कूल के आसपास रहने वाले सभी बच्चे वहां दाखिला लेते हों, नियमित रूप से स्कूल आते हों और स्कूल में उनसे ठीक व्यवहार किया जाता हो। यूनिसेफ ने राज्यों की सहायता की है ताकि वे प्रशिक्षण मॉड्यूल विकसित करें और स्कूल और कक्षाओं के भीतर भेद-भाव को दूर करने के लिए कौशल विकास के प्रशिक्षण कार्यक्रम शामिल करें।

    यूनिसेफ द्वारा ऐसे क्षेत्रों में सामुदायिक कार्यक्रमों की शुरुआत की गई है जहां शिक्षा का स्तर बेहद कम है। सामाजिक स्तर के संगठनों को शामिल करके स्थानीय अभियानों तथा जागरुकता बैठकों के माध्यम से समाज को जागरुक बनाने पर ध्यान केन्द्रित किया गया है —  जैसे स्कूल में उपस्थिति के लिए अभियान चलाना, बच्चों केअधिकारों के बारे में जागरुकता पैदा करना और संवेदनशील परिवारों के साथ विशेष रूप से सीधे बात करना।

    यूनिसेफ द्वारा असम, छत्तीसगढ़, झारखंड और ओडिशा के ऐसे चुनिंदा क्षेत्रों में कार्य शुरु किया गया है, जो संघर्ष से प्रभावित हैं, ताकि बच्चों को उनके मूलभूत अधिकार के तौर पर शिक्षा प्रदान की जा सके। उदाहरण के लिए, असम में यूनिसेफऔर उसके भागीदार दूर-दराज के स्थानों पर छोटे-छोटे समुदायों तक पहुंचे हैं ताकि जहां शिक्षा की कमी है, उनके बच्चों की स्कूल में उपस्थिति सुनिश्चित की जा सके अन्यथा ज़्यादा लोग हाशिए में आ जाएंगे।हालांकि इन चार राज्यों में प्रयासों का तरीका भिन्न रहा है, प्रत्येक राज्य द्वारा उन पहलुओं पर ध्यान दिया जा रहा है जिससे इन क्षेत्रों में बच्चों को आठ वर्ष की अनिवार्य शिक्षा पूरी करने में सहायता मिले। इसके साथ-साथ, यूनिसेफ के शिक्षा एवं बाल सुरक्षाविभागों द्वारा जम्मू एवं कश्मीर में समावेशी योजना की शुरुआत की गई है।

    यूनिसेफकस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय (KGBV) के सुधार के लिए भी कार्य कर रहा है।यहस्कूल छोड़ चुके बच्चों, विशेषकर धार्मिक अल्पसंख्यक समुदायों के बच्चों और 11-14 वर्ष तक की बालिकाओंके लिए आवासीय उच्चप्राथमिक स्कूल कि सुविधा प्रदान करता है। इसके अतिरिक्त, यूनिसेफ ने शारीरिक शिक्षा और खेलकूद कार्यक्रम (‘प्रेरणा’, शारीरिक शिक्षा और खेलकूद के लिए हैंडबुक) की शुरुआत की है, और चुनिंदा कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में अतिसंवेदनशीलता का मानचित्रण किया गया। बालिकाओं के शिक्षा के ऊपरी प्राथमिक स्तर से माध्यमिक स्तर तक जाने की दर में सुधार के लिए विचार-विमर्शों की शुरुआत की गई है। राष्ट्रीय स्तर पर, यूनिसेफ स्कूली शिक्षा और साक्षरता विभाग के साथ मिलकर कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों का राष्ट्रीय मूल्यांकन का काम कर रहा है तथा राज्य स्तरीय कार्यशालाओं के माध्यम से समीक्षा के समन्वय का कार्य कर रहा है।

    बालिकाओं की उन्नति के लिए यूनिसेफ द्वारा डिजिटल जेंडर एटलस,जो एक निर्णय लेने में मदद करने का साधन है, विकसित किया गया था, ताकि विशिष्ट लिंग संबंधित शिक्षण संकेतों पर खराब परिणाम देने वाली उन बालिकाओं के भौगोलिक क्षेत्रों की पहचान की जा सके,जो उपेक्षित वर्गों, जैसे अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों और मुस्लिम अल्पसंख्यक वर्गों से आती हैं।

    स्रोत : www.unicef.org

    आर्थिक सहयोग और विकास संगठन

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    आर्थिक सहयोग और विकास संगठन

    चित्र:OECD logo new.svg

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    संस्थापक सदस्य देश (1961)

    अन्य सदस्य देश संक्षेपाक्षर ओईसीडी

    स्थापना 1948 में ओईईसी के रूप मेंअ

    1961 में ओईसीडी के रूप में पुर्न-संगठित

    प्रकार अंतरसरकारी संगठन

    मुख्यालय पेरिस, फ्रांस

    सदस्यता 35 देश [दिखाएँ] आधिकारिक भाषा अंग्रेजीफ्रांसीसी महासचिव जोस एंजेल गुररिअ उपसचिव प्रमुख रिंटारो तमाकी उपसचिव प्रमुख मेरी कीविनियमि उपसचिव प्रमुख डगलस फ्रांटज

    जालस्थल www.oecd.org

    अ. यूरोपीय आर्थिक सहयोग के लिए संगठन।

    आर्थिक सहयोग और विकास संगठन (ओईसीडी; अंग्रेजी: Organization for Economic Co-operation and Development, OECD), 38 सदस्य देशों की एक अंतरसरकारी आर्थिक संगठन है, जिसकी स्थापना 1960 में आर्थिक प्रगति और विश्व व्यापार को प्रोत्साहित करने हेतु की गई थी। अधिकांश ओईसीडी सदस्य उच्च आय वर्ग अर्थव्यवस्थाएं हैं, जिनकी मानव विकास सूचकांक (एचडीआई) बहुत उच्च हैं, और विकसित देशों के रूप में माना जाता है। ओईसीडी एक आधिकारिक संयुक्त राष्ट्र प्रेक्षक है।[1]

    ओईसीडी के मुख्यालय फ्रांस के पेरिस शहर में हैं।[2] ओईसीडी को सदस्य देशों से प्राप्त योगदान द्वारा वित्त पोषित किया जाता है,[3] और 2015 में इसका कुल बजट 363 लाख यूरो का था।[4]

    अनुक्रम

    1 इतिहास

    2 उद्देश्य और गतिविधियाँ

    3 संरचना 4 सदस्य देश

    5 गैर-सदस्यों के साथ संबंध

    6 आलोचना 7 सन्दर्भ

    इतिहास[संपादित करें]

    इसके आधिकारिक संस्थापक सदस्य हैं:

    ऑस्ट्रिया बेल्जियम कनाडा डेनमार्क फ्रांस पश्चिम जर्मनी यूनान आइसलैंड आयरलैंड इटली लक्समबर्ग नीदरलैंड्स नॉर्वे पुर्तगाल स्पेन स्वीडन स्विट्जरलैंड तुर्की यूनाइटेड किंगडम

    संयुक्त राज्य अमेरिका

    उद्देश्य और गतिविधियाँ[संपादित करें]

    ओईसीडी (OECD) का मुख्य उद्देश्य विश्व अर्थव्यवस्था को बढ़ाना और अंतर्राष्ट्रीय व्यापार को बढ़ावा देना है। - यह विभिन्न देशों की सरकारों को आम समस्याओं

    के समाधान खोजने के लिए संयुक्त रूप से काम

    करने का अवसर प्रदान करता है।

    - इसमें लोकतांत्रिक देशों के साथ काम करना

    शामिल है जो सामान्य आबादी की अर्थव्यवस्था

    और भलाई को बढ़ाने की प्रतिबद्धता साझा करते

    हैं।

    - OECD का मुख्य उद्देश्य दुनिया भर में सरकारों

    का समर्थन करना है:

    बाजारों और संस्थानों के कामकाज में विश्वास

    बढ़ाना।

    - भविष्य के सतत आर्थिक विकास को प्राप्त करने

    के लिए, स्वस्थ सार्वजनिक वित्त प्राप्त करना।

    नवाचार, सतत रणनीतियों और विकासशील

    अर्थव्यवस्थाओं की स्थिरता द्वारा विकास प्राप्त

    करना।

    - लोगों के उत्पादक कौशल को बढ़ाने के लिए

    संसाधन उपलब्ध कराना।

    संरचना[संपादित करें]

    ओईसीडी अपने कार्यों का निष्पादन परिषद्, कार्यकारी समिति, सचिवालय तथा अनेक सहायक अंगों के माध्यम से करता है।

    ओईसीडी का प्रधान अंग परिषद् है, जिसमे सभी सदस्य देशों के प्रतिनिधि सम्मिलित होते हैं। इसकी मंत्री स्तर पर कम-से-कम एक और स्थायी प्रतिनिधि (अर्थात् राष्ट्रीय प्रतिनिधिमंडलों के प्रधान) के स्तर पर कम-से-कम दो बैठकें आवश्यक रूप से आयोजित होती हैं। परिषद संगठन की सामान्य नीति का निर्धारण करती है। स्थायी समिति परिषद द्वारा प्रत्येक वर्ष निर्वाचित 14 सदस्यों से बनी होती है। इसका कार्य ओईसीडी की गतिविधियों का पर्यवेक्षण करना है तथा सप्ताह में सामान्यतया इसकी एक बैठक होती है। सचिवालय का प्रधान अधिकारी महासचिव होता है, जो परिषद और कार्यकारी समिति के निर्णयों की क्रियान्वित करने के लिये उत्तरदायी होता है। इसके अतिरिक्त, महासचिव वार्षिक और सहायक बजटों को भी प्रस्तुत करता है।

    परिषद विभिन्न कार्यों के लिये सहायक अंगों को गठित करने के लिये अधिकृत होती है। विकास सहायता समिति (डीएसी) ओईसीडी के प्रमुख पूंजी-निर्यातक देशों और यूरोपीय संघ के प्रतिनिधियों से बनी होती है तथा सदस्यों के अधिकारिक संसाधनों के हस्तांतरण के लिये जिम्मेदार होती है। डीएसी का मुख्य उद्देश्य स्थायी आर्थिक और सामाजिक विकास के लिये अंतरराष्ट्रीय वितीय पोषण में समन्वित, एकीकृत और प्रभावशाली प्रयास को प्रोत्साहन देना है। सदस्य देशों के वरिष्ठ अधिकारियों से बनी आर्थिक नीति समिति सदस्य देशों की आर्थिक गतिविधियों की समीक्षा करती है। आर्थिक और विकास समीक्षा समिति किसी सदस्य देश विशेष का वार्षिक सर्वेक्षण तैयार करती है। व्यापार समिति व्यावसायिक नीतियों और अभ्यासों तथा विशिष्ट व्यापार समस्याओं से जुड़ी होती है। अंतरराष्ट्रीय निवेश और बहुराष्ट्रीय उद्यम समिति ने बहुराष्ट्रीय कपनियों के लिये स्वैच्छिक आचार संहिता तैयार की, जिसे ओईसीडी ने वर्ष 1976 में अपनाया।

    इसके अतिरिक्त, कृषि, उपभोक्ता नीति, शिक्षा, उर्जा, पर्यावरण, वित्तीय बाज़ार, राजकोषीय मामले, उद्योग, परोक्ष लेन-देन, मानवशक्ति और सामाजिक मामले, समुद्री परिवहन, प्रतिबंधकव्यापर अभ्यासों, वैज्ञानिक और तकनीकी नीति और पर्यटन के क्षेत्र में समितियां गठित की गयी हैं। वस्तुओं, सकारात्मक समायोजन नीतियों और महिला रोजगार पर उच्च स्तरीय समूहों तथा उत्तर-दक्षिण आर्थिक सिशयों के लिए कार्यकारी समिति समूह कार्यरत हैं।

    कई परिचालन अभिकरण गठित किए गए हैं, जैसे-विश्व के निर्धनतम लोगों की मौलिक आवश्यकताओं पर केंद्रित ओईसीडी विकास केंद्र; सदस्य देशों की शिक्षा प्रणाली में सुधार लाने के उद्देश्य से गठित शैक्षणिक अनुसंधान और नवाचार केंद्र (सीईआरआई); शांतिपूर्ण नाभिकीय ऊर्जा विकास के लिये नाभिकीय ऊर्जा एजेंसी (एनईए); मध्य एवं पूर्वी यूरोपीय देशों की प्रजातंत्र तथा बाजारोन्मुखी अर्थव्यवस्था विकसित करने में सहायता देने के उद्देश्य से गठित यूरोपीय अर्थव्यवस्था पारगमन सहयोग केंद्र (सीसीईटी)।

    स्रोत : hi.wikipedia.org

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    June 27, 2018 | Author: Anonymous | Category: Social Science, Political Science

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    " Hu sammati thi sabandho ni umar 16 karvano virodh karu chhu." Name: parbat m.kachhot City name : veraval(somnath) At : Adri. " I opposed to central Govrnment Bill for only & only mutual sex age limit 16 years." plz sand with your name & city. From sharad  bhavnagar gujarat to 8082005060 " MAI Sahamati se Sambndhon ki Umra 16 Varsh Karane ka Virodh karta hu. " VITTHAL R. VAISHNAV SANCHORE  " Mai sehmati se sambandho ki age 16 karne ka virodh karta hu. " Parveen Mehla. Guhla‐cheeka (kaithal) Haryana. " Mai sehmati se sambandho ki age 16 karne ka virodh karta hu. " Parveen Mehla. Guhla‐cheeka (kaithal) Haryana. " Main Sahmati se Sambandho ki Umra 16 karne ka virodh karta hu. " SATISH RATHORE INDORE. " main sehmati se sambandhon ki umar 16 karne ka virodh karta hoon" Dr. Sharad yadav bhind m.p.  " Ordinance of Anti rape(Criminal Law amendment) Bill" GOM agreed of age of Sixteen for Sax, how many amounts received from  Contraceptive pill Drugs Companies. ‐ Ankur from Vidisha. " Sirf Aapke Liye " Bhrastachar ke Khatme Hetu Avm janta ka Shasan Lane ke Liye Aam Aadmi Party ke Sadasy Bankar ya Banvakar  yogdan Sahyog Nhi karege.. Aapka‐kkDixit.advo ".Mai Sahmati Se Sambndho Ki Umar 16 Karne Ka Virodh Karti Hun!"Himanshi Namdev. INDORE(M.P.) "@mai sahamati se sanbandhon ki umar 16 karne ka virodh karta hun ! Ashok saini fatehpur sikar raj. "  "16 saal me yon sambhand aur 18 saal me shaadi" es majaak ka virodh nahi kiya gaya to mazbooran (kaanoonan) hame swikaarna  padega. MANHAR Marwar Junction [email protected]

    Andhra Pradesh Andhra Pradesh Andhra Pradesh Assam Bihar Bihar Bihar Bihar Bihar Bihar Bihar Bihar

    "Bhartiya sankriti ki pavitrata ko nasht ki sajish " Hamari gouravshali bhartiya sanskriti mai koi bhi or kisi bhi koi bhi ladka ladki shadi se  pahle apne pavitrata ko bhang nahi karna chahta fir sarkar shadi se pahle sambandh bana kr kyo awaidhya sambandho ko badhava de  rahi h. Jiska mai virodh karta hu. Mahendra singh chouhan. Red rose secondary school mungana(RAJASTHAN) Bihar "Bhartiya sankriti ki pavitrata ko nasht ki sajish " Hamari gouravshali bhartiya sanskriti mai koi bhi or kisi bhi parivar ka koi bhi ladka  ladki shadi se pahle apne pavitrata ko bhang nahi karna chahta fir sarkar shadi se pahle sambandh bana kr kyo awaidhya sambandho  ko badhava de rahi h. Jiska mai virodh karta hu. Mahendra singh chouhan. Red rose secondary school mungana(RAJASTHAN) Bihar "Dainik bhaskar" ne mahilaon ke prati jo kadam uthya hai wah sarahniy hai.Nari is des ka abhinn ang hai ,koi sarkar ki chunaw policy  nahi,jo kabhi bhi apane mann se badl di jaay."Sarkar ka dimag thikane pe hai ya nahi? Itne choti umar me samjata hi kya hai?medically  yah dekha jaye to wah is chij ke liye pripar nahi hoti iseme kaise samaj ki stapna hogi.Nirbal,asay vikrut,kuposit samaj banega,  prob.kam karne hai to bachho ki skul me ak pired "sanskar,adhatmik unnati "ka kampalsari kijiye tab jakar sab thik hoga. Aur ak bat  filmo,T.v. Par ashalilta band kijiye isise bachhe bigad rahe hai.‐ mrs. varsha masurkar, 41, amba nagar dighori nagpur .9  "Des ki sabse bari samsya he population,& es niyam ko lakar petrol ko aag dikhane ka kam karne jesa h."1st desh ki siksha paddhati  badle. bounty banote balaghat "Hu Sahmati thi Sambadh Mate ni Ummar 16 Karvano Virodh Karu Chu." plz right to dcsn n proud to be Indian "Hu sahmati thi sambandh mate ni umar 16 karwano virodh karu 6u" naresh liladhar rathod, ahmedabad, gujrat. "I am against the relationship at age 16" .... And plz take it seriously Rashmi Makode Nagpur..... "I AM NOT AGREE TO MINUS THE AGE OF MAKING RELATIONSHIP WITH AGREEMENT TO 16 YEAR" ASHISH SINGH DIS.‐JABLPUR  MADHAY PRADESH "I STRICTLY OPPOSE d Sex Relationship at d Age 16. It iz Just Disgusting. Will Increase Population. It iz WRONG Dicision." ‐>VIPIN SONI.  "I STRICTLY OPPOSE d Sex Relationship at d Age 16. It iz Just Disgusting. Will Increase Population. It iz WRONG Dicision." ‐>VIPIN SONI.  Age 21yrs Jabalpur M.P.

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    "Jis Desh ki sanskriti 25‐varsh 'Brahamcharia ka vrat rakhna sikhati h ,vhan '16varsh' besharmi ki had aur durbhagya ka agar h." "Jis Desh ki sanskriti 25‐varsh 'Brahamcharia ka vrat rakhna sikhati h ,vhan '16varsh' besharmi ki had aur durbhagya ka agar h."  Satyawan Ghanghas distt.Bhiwani (HARYANA)

    Bihar

    "Jis Desh ki sanskriti 25‐varsh 'Brahamcharixa ka vrat rakhna sikhati h ,vhan '16varsh' besharmi ki had aur durbhagya ka agar h." "Jis umra me bachcha/bachchi,thik se kapada pahenana nahi jante,wo,relation banane ko jayenge. Really congress party puri pagal ho  gai hai. Inko supreme court se "DEKHTE HI GOLI MARNE KA ORDER NIKALANA CHAHIYE".Aaj mahsus ho raha hai ki itly ki lady ka  chairperson hone ke mayne kya hai. Kisi bhi keemat me ye pass nahi hona chahiye,balki 18ys ko badhake 21ys karna hoga. Deepak  Pandey, RAIPUR, CHHATTISGARH. "kaam karodh nagar bahu bharya ...." Guru Nanak "M sahmati se sambandho ki umar karne ka virodh karti hu". Shweta, Bikaner, Rajasthan "M SAHMTI SE SAMBANDHO KI UMR 16 KRNE KA VRODH KRTA HU".YE IS DAUR KI SARKAR KE NETAO KE DIMAGI DIVALIYAPAN KI  PARAKASHTHA H. KAMAL SINGH ,ALWAR(RAJASTHAN)  "Ma sahmatte sa sambando ke umer 16 karna ka verodh karta hu" gaurav, jaipur  "mai sahmati se relation ki age 16 karne ka virodh karta hu"............Tarun baraskar betul m.p.  "Mai sahmati se sambandho ke umr 16 krne ka birodh krta hun"

    स्रोत : nanopdf.com

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    Mohammed 7 day ago
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