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    चेस्ट एक्स

    फेफड़े ऑक्सीजन के आदान-प्रदान के लिए आवश्यक वायुमार्ग (airways)हैं। यदि ये वायुमार्ग फ्लुइड्स से भरे हुए हैं, तो वे सांस लेने में समस्या और गंभीर स्थिति पैदा कर सकते हैं।

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    Overall Health In Hindi

    चेस्ट एक्स-रे रिपोर्ट में प्रमुख ब्रोंकोवास्कुलर मार्किंग: आप सभी को पता होना चाहिए

    Medically Reviewed By

    Dr. Ragiinii Sharma Home Hindi

    Overall Health In Hindi

    चेस्ट एक्स-� ...

    चेस्ट का एक्स-रे चेस्ट के अंगों- हृदय, फेफड़े, चेस्ट की हड्डियों, वायुमार्ग या ब्रोन्किओल्स, ब्लड वेसल्स और रीढ़ (heart, lungs, chest bones, airways or bronchioles, blood vessels, and spine) की स्थिति की जांच के लिए आमतौर पर की जाने वाली रेडियोलॉजिकल प्रक्रिया है। चेस्ट एक्स-रे फेफड़ों में और उसके आसपास तरल पदार्थ का भी सीमांकन (demarcate)करते हैं।

    चेस्ट के एक्स-रे के दौरान ब्रोन्कोवास्कुलर मार्किंग्स फेफड़ों में वाहिकाओं का प्रतिनिधित्व( representations) करते हैं। ये ब्रोन्कोवास्कुलर मार्किंग्स  तभी प्रमुख होते हैं जब श्वसन मार्ग(respiratory passages) के वायुमार्ग(airways) तरल पदार्थ या बलगम ( fluids or mucus)से भर जाते हैं।

    यह आर्टिकल आगे प्रमुख ब्रोन्कोवास्कुलर मार्किंग्स  की विभिन्न चेस्ट एक्स-रे रिपोर्ट्स की जांच करता है और यह बताता हैं कि उनमें से प्रत्येक क्या संकेत करता है।

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    प्रमुख ब्रोन्कोवास्कुलर मार्किंग क्या हैं?(What are prominent bronchovascular markings?)

    चेस्ट का एक्स-रे फेफड़ों, हृदय, रक्त वाहिकाओं, पसलियों और रीढ़ सहित चेस्ट के अंगों की स्थिति का आकलन करने के लिए की जाने वाली एक सामान्य परीक्षा प्रक्रिया है। चेस्ट के एक्स-रे के दौरान, नियंत्रित आयनाइजिंग रेडिएशंस (ionizing radiations) चेस्ट के अंदर की छवियां बनाते हैं।

    फेफड़े हमारे सिस्टम के महत्वपूर्ण अंग हैं जो हमें सांस लेने में मदद करते हैं। वायुमार्ग फेफड़ों के आवश्यक मार्ग हैं, और इन वायुमार्गों में किसी भी रुकावट या बलगम को चेस्ट के एक्स-रे के माध्यम से देखा जा सकता है।

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    ब्रोन्कोवास्कुलर मार्किंग चेस्ट के एक्स-रे के दौरान जाँच किए गए पैरामीटर्स में से एक हैं। ये मार्किंग्स फेफड़ों के वेसल्स को इंडीकेट करते हैं जो आमतौर पर कम प्रमुख होते हैं या दिखाई नहीं देते हैं क्योंकि उनके भीतर हवा होती है।

    बढ़े हुए या प्रमुख ब्रोन्कोवास्कुलर मार्किंग का मतलब है कि फेफड़े तरल पदार्थ से भर जाते हैं और एक्स-रे में अधिक दिखाई देने लगते हैं। जब साँस अंदर लेने के समय चेस्ट का एक्स-रे लिया जाता है तो प्रमुख मार्किंग भी देखी जाती हैं। साँस लेने के दौरान फेफड़ों की रक्त वाहिकाएं (ब्लड वेसल्स )फैल जाती हैं।

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    प्रमुख ब्रोन्कोवास्कुलर मार्किंग से क्या संकेत मिलता है?(What do prominent bronchovascular markings indicate?)

    कभी-कभी, ब्रोन्कोवास्कुलर मार्किंग थोड़ा दिखाई देते हैं। ब्रोन्कोवास्कुलर मार्किंग की ये हल्की प्रमुखता फेफड़ों के इन्फेक्शन के कारण होती है।

    प्रमुख ब्रोन्कोवास्कुलर मार्किंग  संकेत कर सकते हैं:

    अस्थमा(Asthma)– वह स्थिति जहां वायुमार्ग में सूजन और संकीर्णता (swelling and narrowing) की वजह से अधिक बलगम पैदा हो जाता है।क्रोनिक ब्रोंकाइटिस(Chronic bronchitis)– ब्रोंकाइ( bronchi) की गंभीर और लंबे समय तक की सूजनब्रोन्कोपमोनिया(Bronchopneumonia)- न्यूमोकोकल संक्रमण(Pneumococcal infection) के कारण संकुचित वायुमार्ग(constricted airways) और एल्वियोलाइ(alveoli) की सूजन।प्लूरीसी(Pleurisy) – फेफड़ों की सूजन जिससे सीने में तेज दर्द और सांस लेने में तकलीफ होती हैकार्डिएक विफलता(A Cardiac failure) – एक ऐसी स्थिति जब हृदय मुख्य वेसल्स में पर्याप्त ब्लड  पंप नहीं कर पाता है।ब्लड हृदय में जमा हो जाता है जिससे फेफड़ों की रक्त वाहिकाएं(ब्लड वेसल्स) फैल जाती हैंपल्मोनरी हाइपरटेंशन(Pulmonary hypertension)– एक प्रकार का ब्लड प्रेशर जो फेफड़ों और हृदय में आर्टरीज को प्रभावित करता है।वेनो-ओक्लूसिव डिजीज(Veno-occlusive disease)– पल्मोनरी नस का बंद होना(Occlusion of pulmonary vein)– वह रक्त वाहिका (ब्लड वेसल्स) जो फेफड़ों से ऑक्सीजन युक्त(oxygenated) ब्लड को हृदय तक ले जाती है

    हालाँकि, उपरोक्त शर्तें केवल संकेत हैं। आगे के एनालिसिस , टेस्ट्स , और  ट्रीटमेंट के लिए आपको अपने डॉक्टर  से परामर्श करने की आवश्यकता होगी।

    निष्कर्ष(conclusion)

    फेफड़े ऑक्सीजन के आदान-प्रदान के लिए आवश्यक वायुमार्ग (airways)हैं। यदि ये वायुमार्ग फ्लुइड्स से भरे हुए हैं, तो वे सांस लेने में समस्या और गंभीर स्थिति पैदा कर सकते हैं। चेस्ट का एक्स-रे इन स्थितियों को इंडीकेट  करता है और अगर आपकी चेस्ट की एक्स-रे रिपोर्ट में प्रमुख ब्रोन्कोवास्कुलर मार्किंग दिखाई देते हैं,तो यह फेफड़ों में  फ्लुइड्स, रुकावट या इन्फेक्शन्स का संकेत दे सकता है। आपका डॉक्टर आपको आगे की परीक्षण और ट्रीटमेंट के बारे में गाइड करेगा।

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    Bronchitis in Hindi: क्या आपकी ज़िद्दी खाँसी ब्रोंकाइटिस का लक्षण है?

    जब श्वासनलि यानी वह मार्ग जिस से फेफड़ों में श्वास आती और जाती हैं में सूजन और जलन हो जाती है - उसको ब्रोंकाइटिस (Bronchitis in Hindi) कहते हैं। जानिए ब्रोंकाइटिस और दमा में फरक, bronchitis symptoms और bronchitis home treatment (in Hindi)।

    Bronchitis in Hindi: क्या आपकी ज़िद्दी खाँसी ब्रोंकाइटिस का लक्षण है?

    By Sitaram Bhartia Team | October 10, 2018 | Internal Medicine |

    आपके फेफड़ों में श्वास जिस मार्ग से आती और जाती हैं, उस अंग को श्वासनलि कहते है। यदि आपके श्वासनलि में जलन और सूजन हो जाए तो आपको ब्रोंकाइटिस (Bronchitis in Hindi) हो सकता हैं।

    यह एक तरह का उत्तेजन है जिसकी वजह से श्वासनलि ज़्यादा बलगम बनाती है।

    डॉ मयंक उप्पल,  Consultant, General Medicine कहते हैं, “ब्रोंकाइटिस के रोगी ज़्यादातर ज़िद्दी खाँसी और कई बार उसमें निकलने वाली बलगम की शिकायत करते हैं।”

    प्रेरणा सह, 25, भी कई दिनों से लगातार होने वाली खाँसी से पीड़ित थी।

    वह काफी समय से इसको जुखाम समझ कर नज़र अंदाज़ कर रही थी पर जब खाँसी बहुत बढ़ गई तो उन्होंने डॉ मयंक से परामर्श करने का सोचा। उनके परामर्श के दौरान यह बात हुई।

    Bronchitis symptoms in hindi

    जैसे प्रेरणा ने अपनी स्थिति के बारे में बताया और कितने दिनों से उसको खाँसी हो रही थी, डॉ मयंक ने स्टेथस्कोप लगा के उनकी जाँच की। जब डॉक्टर ने प्रेरणा के फेफड़ों की ध्वनि को सुना तो उन्हें ब्रोंकाइटिस का अंदेशा हुआ।

    डॉ मयंक ने ब्रोंकाइटिस की संभावना के बारे में प्रेरणा को बताया और वह ब्रोंकाइटिस के लक्षणों के बारे में जानने के लिए उत्सुक हो गई।

    ब्रोंकाइटिस के लक्षण है :

    खाँसी बलगम का उत्पादन सर दर्द नाक बहना

    कुछ केसेस में, सांस लेने में कठिनाई

    डॉ मयंक ने जवाब देते हुई कहा, “ब्रोंकाइटिस में अत्यधिक खाँसी, सर दर्द और कई लोगों को सांस लेने में कठिनाई भी हो सकती है।”

    “याद रहे, ब्रोंकाइटिस दो प्रकार के होते है – अक्यूट ब्रोंकाइटिस और क्रानिक ब्रोंकाइटिस । इन के लक्षणों में बहुत अंतर नहीं होता पर फ़र्क इनके अवधि और दशा में होता है।”

    डॉ मयंक बताते हैं “अक्यूट ब्रोंकाइटिस में सर्दी- जुखाम जैसे लक्षण मेहसूस होते हैं जैसे नाक बहना, खाँसी और हल्का सर दर्द। यह ज़्यादातर एक हफ्ते में सुधरने लगता है”

    क्रानिक ब्रोंकाइटिस एक गम्भीर बीमारी है जिसमें श्वासनलि मे निरन्तर जलन या सूजन रहती हैं और अकसर यह सिगरेट के सेवन से होता हैं।

    “क्रानिक ब्रोंकाइटिस में समय के साथ खाँसी और संबंधित लक्षण बदतर होते जाते है। कई बार, इसमें खाँसी तीन महीनों से अधिक तक रह सकती है।”

    ब्रोंकाइटिस में सांस लेने में कठिनाई हो सकती है जिसकी वजह से बहुत लोग ब्रोंकाइटिस और दमा के रोग को सामान्य समझते है।

    प्रेरणा का भी यही मानना था। यह अनिवार्य है की हम इन दोनों के अंतर को समझें।

    ब्रोंकाइटिस और दमा में क्या फ़र्क होता हैं?

    डॉ मयंक ने प्रेरणा को समझाया, “सबसे अहम बात, ब्रोंकाइटिस में श्वासनलियाँ (bronchial tubes) में सूजन और जलन होती है पर दमा में वायुमार्ग सिकुड़ और सूज जाते है”

    “कई बार, ब्रोंकाइटिस बदलते मौसम के वजह से हो सकता है पर दमा मौसम की वजह से नहीं होता। मौसमी परिवर्तन की वजह से दमा बदतर हो सकता हैं पर वह इसके पीछे का कारण नहीं हैं।”

    ब्रोंकाइटिस में खाँसी होना एक प्रमुख लक्षण है पर दमा में खाँसी होना ज़रूरी नहीं हैं।

    डॉ मयंक के सुझाव पर, प्रेरणा ने ब्रोंकाइटिस टेस्ट कराने का निर्णय लिया।

    ब्रोंकाइटिस के रोग का निर्णय

    “कई बार, ब्रोंकाइटिस के निर्णय के लिए आपको चेस्ट एक्सरे (chest x-ray), बलगम या फेफड़ों की जाँच भी करवानी पड़ सकती हैं।”

    प्रेरणा के टेस्ट रिज़ल्ट में अक्यूट ब्रोंकाइटिस निकला। वह जानना चाहती थी की ब्रोंकाइटिस क्यों होता हैं।

    ब्रोंकाइटिस के कारण क्या है?

    अक्यूट ब्रोंकाइटिस के पीछे अधिकतर वाइरस का हाथ होता है। यह वायरस ज़्यादातर जुखाम और फ़्लू के लिए भी ज़िम्मेदार होता है। क्रानिक ब्रोंकाइटिस का सबसे आम कारण सिगरेट या धुम्रपान है।

    डॉ मयंक कहते है “वायु प्रदूषण, धूल-मिट्टी और जहरीली गैस भी क्रानिक ब्रोंकाइटिस के कारण हो सकते हैं।”

    ब्रोंकाइटिस का उपचार

    डॉ मयंक ने कहा “अक्यूट ब्रोंकाइटिस में उपचार की  ज़रूरत नहीं पड़ती और यह अधिकतर कुछ हफ्तों में खुद ठीक हो जाता है।”

    “आम तौर पर , ब्रोंकाइटिस का कारण वायरस होता है इसलिए एंटीबायोटिक दवाओं का इन पर कोई असर नहीं पड़ता।

    “लेकिन अगर आपके डॉक्टर को ब्रोंकाइटिस का कारण बैक्टीरिया लगता है तो वह आपको  एंटीबायोटिक दवा निर्धारण कर सकते है।”

    कुछ परिस्थितियों में आपके डॉक्टर, आपको यह दवाई की भी सलाह दे सकते हैं:

    खाँसी की दीवाई: अगर खाँसी की वजह से आप विश्राम नहीं कर पा रही, तो आपके डॉक्टर आपको खाँसी की दीवाई नियत कर सकते हैं।दूसरी दवाई: अगर आपको एलर्जी, दमा या क्रानिक अब्स्ट्रक्टिव फेफड़ों का रोग (COPD) है, तो आपके डॉक्टर शायद श्वासयंत्र (inhaler) और अन्य दवाई दे सकते हैं। इससे जलन और सूजन में आराम मिल सकता है और  ट्यूब खुल सकते हैं।

    डॉ मयंक ने प्रेरणा के ब्रोंकाइटिस की स्तिथि को समझते हुई, उसको ख़ासी के लिए कुछ दवाई दी और स्टीम लेने की सलाह दी।

    प्रेरणा जानना चाहती थी की दवाई के अलावा, वह घर पर अपना ध्यान खुद कैसे कर सकती है।

    Bronchitis home treatment in Hindi

    ब्रोंकाइटिस  के घरेलु इलाज के लिए कुछ चीज़ों का ध्यान रखें :

    सिगरेट या तम्बाकू का सेवन न करें। अगर आपके जानने वाली सिगरेट पी रहे हो तो उनसे दूर रहे। सिगरेट का धुँआ आपके लिए हानिकारक है।

    बहार जाने से पहले, मास्क पहने या अपना मुँह और नाक को कपड़े से ढक ले, ख़ास तौर पर जब आप प्रदूषण, पेंट या सफ़ाई करनेवाले उत्पादन के संपर्क में आएें।

    अपने आस-पास वायु को नम रखने वाला उपकरण रखें।

    डॉ मयंक अंत में कहते हैं “ब्रोंकाइटिस को मैनिज करना ज़्यादा मुश्किल नहीं है – बस थोड़ा ध्यान और देख-भाल करने की ज़रुरत होती है। आप सुरक्षात्मक उपायों जैसे मास्क को अपनाए और समय-समय पर अपनी जाँच करवाएं।”

    “अगर आपको अपना ब्रोंकाइटिस बदतर होतें हुई दिखें, तो अपने डॉक्टर से सलाह लेने में हिचकीचाय नहीं।”

    स्रोत : www.sitarambhartia.org

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    Mohammed 1 month ago
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