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    kis loksabha nirvachan kshetra ka pratinidhitva abhi tak kisi pradhanmantri ne nahin kiya

    Mohammed

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    Lok Sabha

    संसद देश का सर्वोच्च विधायी निकाय है। हमारी संसद राष्ट्रपति और दो सदनों-लोक सभा (हाउस आफ द पीपुल) और राज्य सभा (काँसिल ऑफ स्टेट्स) से मिला कर बनती है। राष्ट्रपति के पास संसद के किसी भी सदन की बैठक बुलाने और सत्रावसान करने अथवा लोक सभा को भंग करने का अधिकार है।

    26 जनवरी, 1950 को भारत का संविधान प्रभावी हुआ। वर्ष 1951-52 के दौरान नए संविधान के अंतर्गत पहला आम चुनाव हुआ और अप्रैल 1952 में प्रथम निर्वाचित संसद, अप्रैल 1957 में दूसरी लोक सभा, अप्रैल 1962 में तीसरी लोक सभा, मार्च 1967 में चौथी लोक सभा, मार्च 1971 में पांचवी लोक सभा, मार्च 1977 में छठी लोक सभा, जनवरी 1980 में सातवीं लोक सभा, दिसम्बर 1984 में आठवीं लोक सभा, दिसम्बर 1989 में नौवीं लोक सभा, जून 1991 में दसवीं लोक सभा, मई 1996 में ग्यारहवीं लोक सभा, मार्च 1998 में बारहवीं लोक सभा और अक्तूबर 1999 में तेरहवीं लोक सभा अस्तित्व में आयी।

    लोक सभा

    जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है, लोक सभा जन प्रतिनिधियों का निकाय है। इसके सदस्यों का प्रत्यक्ष निर्वाचन मताधिकार सम्पन्न वयस्क लोगों द्वारा सामान्यतः प्रत्येक 5 वर्षों में एक बार किया जाता है। सदन की सदस्यता के लिए न्यूनतम अर्ह आयु 25 वर्ष है। लोक सभा की वर्तमान सदस्य संख्या 545 है। विभिन्न राज्यों और संघ राज्य क्षेत्रों के बीच विभाजित सदस्यों की संख्या निम्नवत् है-

    (1) आंध्र प्रदेश 42

    (2) अरुणाचल प्रदेश 2

    (3) असम 14 (4) बिहार 40 (5) छत्तीसगढ़ 11 (6) गोवा 2 (7) गुजरात 26 (8) हरियाणा 10 (9) हिमाचल प्रदेश 4

    (10) जम्मू और कश्मीर 6

    (11) झारखंड 14 (12) कर्नाटक 28 (13) केरल 20 (14) मध्य प्रदेश 29 (15) महाराष्ट्र 48 (16) मणिपुर 2 (17) मेघालय 2 (18) मिजोरम 1 (19) नागालैंड 1 (20) उड़ीसा 21 (21) पंजाब 13 (22) राजस्थान 25 (23) सिक्किम 1 (24) तमिलनाडु 39 (25) त्रिपुरा 2 (26) उत्तरांचल 5

    (27) उत्तर प्रदेश 80

    (28) पश्चिम बंगाल 42

    (29) अंडमान और निकोबार 1

    (30) चंडीगढ़ 1

    (31) दादर और नागर हवेली 1

    (32) दमन और द्वीव 1

    (33) राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली 7

    (34) लक्षद्वीप 1 (35) पांडिचेरी 1

    (36) आंग्ल भारतीय ( यदि संविधान के अनु. 331 के अंतर्गत राष्ट्रपति द्वारा नामनिर्दिष्ट किए गए हैं)

    राज्य सभा

    राज्य सभा संसद का उच्च सदन है। इसमें 250 से अनधिक सदस्य हैं। राज्य सभा के सदस्य लोगों द्वारा सीधे निर्वाचित नहीं होते बल्कि विभिन्न राज्यों की विधान सभाओं द्वारा अप्रत्यक्ष रूप से निर्वाचित होते हैं। प्रत्येक राज्य को निश्चित सदस्य संख्या आबंटित की गयी है। राज्य सभा का कोई भी सदस्य 30 वर्ष से कम आयु का नहीं हो सकता है।

    राष्ट्रपति द्वारा राज्य सभा के 12 सदस्य नाम निर्देशित किए जाते हैं जिन्हें साहित्य, विज्ञान, कला और सामाजिक सेवा के संबंध में विशेष ज्ञान या व्यावहारिक अनुभव है।

    राज्य सभा एक स्थायी निकाय है। इसका विघटन नहीं होता किंतु प्रत्येक दो वर्ष में इसके एक तिहाई सदस्य सेवानिवृत्त होते हैं। राज्य सभा का 3 अप्रैल 1952 को प्रथम बार यथाविधि गठन हुआ तथा इसकी पहली बैठक उस वर्ष 13 मई को हुई।

    वर्तमान में राज्य सभा में 245 सदस्यगण है जिनका विभिन्न राज्यों और संघ राज्य क्षेत्रवार विभाजन निम्नवत है

    (1) आंध्र प्रदेश 18

    (2) अरुणाचल प्रदेश 1

    (3) असम 7 (4) बिहार 16 (5) छत्तीसगढ़ 5 (6) गोवा 1 (7) गुजरात 15 (8) हरियाणा 5 (9) हिमाचल प्रदेश 3

    (10) जम्मू और कश्मीर 4

    (11) झारखंड 6 (12) कर्नाटक 12 (13) केरल 9 (14) मध्य प्रदेश 11 (15) महाराष्ट्र 19 (16) मणिपुर 1 (17) मेघालय 1 (18) मिजोरम 1 (19) नागालैंड 1 (20) उड़ीसा 10 (21) पंजाब 7 (22) राजस्थान 10 (23) सिक्किम 1 (24) तमिलनाडु 18 (25) त्रिपुरा 1 (26) उत्तरांचल 3

    (27) उत्तर प्रदेश 31

    (28) पश्चिम बंगाल 16

    (29) राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली 3

    (30) पांडिचेरी 1

    (31) संविधान के अनुच्छेद 80(1)(क) के अंतर्गत 12 सदस्य राष्ट्रपति द्वारा नामनिर्दिष्ट होंगे।

    पीठासीन अधिकारी

    लोक सभा अपने सदस्यों में से एक सदस्य का चुनाव पीठासीन अधिकारी के रूप में करती है और उसे अध्यक्ष कहा जाता है। उसकी सहायता के लिए उपाध्यक्ष होता है जिसका चुनाव भी लोक सभा द्वारा किया जाता है। लोक सभा में कार्य संचालन का उत्तरदायित्व अध्यक्ष का है।

    भारत का उपराष्ट्रपति राज्य सभा का पदेन सभापति होता है। उसका निर्वाचन एक निर्वाचक मंडल द्वारा किया जाता है जो संसद के दोनों सदनों के सदस्यों से मिलकर बनता है। राज्य सभा भी अपने सदस्यों में से एक सदस्य का चुनाव उप सभापति के रूप में करती है।

    लोक सभा और राज्य सभा के कार्य

    दोनों सदनों का मुख्य कार्य विधान पारित करना है। किसी भी विधेयक के विधान बनने के पूर्व इसे दोनों सदनों द्वारा पारित किया जाना होता है तथा राष्ट्रपति की अनुमति प्राप्त करनी होती है। संसद भारत के संविधान की सातवीं अनुसूची की संघ सूची के अंतर्गत उल्लिखित विषयों पर विधान बना सकता है। मोटे तौर पर संघ विषय में वैसे महत्वपूर्ण विषय हैं जिनका प्रशासन सुविधा, कार्यकुशलता तथा सुरक्षा कारणों से अखिल-भारतीय आधार पर किया जाता है। मुख्य संघ विषय हैं रक्षा, विदेश, रेलवे, परिवहन तथा संचार, करेंसी तथा सिक्का-ढलाई, बैंकिंग, सीमाशुल्क तथा उत्पाद शुल्क। ऐसे अन्य अनेक विषय हैं जिन पर संसद तथा राज्य विधानमंडल दोनों विधान बना सकते हैं।

    इस श्रेणी के अंतर्गत आर्थिक तथा सामाजिक योजना, सामाजिक सुरक्षा तथा बीमा, श्रम कल्याण, मूल्य नियंत्रण तथा महत्वपूर्ण सांख्यिकी का उल्लेख किया जा सकता है।

    विधान पारित करने के अतिरिक्त संसद संकल्प, स्थगन प्रस्ताव, चर्चा तथा सदस्यों द्वारा मंत्रियों को संबोधित प्रश्नों के माध्यम से देश के प्रशासन पर नियंत्रण रख सकती है तथा लोगों की स्वतंत्रताओं की रक्षा कर सकती है।

    लोक सभा और राज्य सभा में अंतर

    (1) लोक सभा के सदस्यों का चुनाव पात्र मतदाताओं द्वारा प्रत्यक्ष रूप से किया जाता है। राज्य सभा के सदस्यों का चुनाव राज्य विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्यों द्वारा आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली के अनुरूप एकल संक्रमणीय मत द्वारा किया जाता है।

    स्रोत : 164.100.47.194

    लोकसभा

    यह भारत का राष्ट्रीय पोर्टल है जिसका विकास भारत सरकार के विभिन्‍न संगठनों द्वारा दी जा रही सेवाओं और सूचनाओं की जानकारी एक ही स्‍थान पर उपलब्‍ध कराने के उद्देश्‍य से किया गया है।

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    मुख्य पृष्ठसरकारसंसदलोकसभा

    Lok Sabha

    संसद

    लोकसभा

    लोकसभा का संघटन सार्वभौम वयस्‍क मताधिक के आधार पर प्रत्‍यक्ष चुनाव द्वारा चुने गए प्रतिनिधियों से किया जाता है। संविधान में व्‍यवस्‍था है कि सदन की अधिकतम सदस्‍य संख्‍या 552 होगी – 530 सदस्‍य राज्‍यों का प्रतिनिधित्‍व करेंगे, 20 सदस्‍य संघशासित प्रदेशों का प्रतिनिधित्‍व करेंगे तथा 2 सदस्‍यों को राष्‍ट्रपति द्वारा एंग्‍लो-इण्डियन समुदाय से नामित किया जाएगा। वर्तमान में सदन की सदस्‍य संख्‍या 543 है। लोकसभा का कार्य काल, यदि इसे भंग न किया जाए, इसकी प्रथम बैठक के लिए नियुक्‍त तिथि से पांच वर्ष है। तथापि, जब आपात उद्घोषणा प्रचालनरत हो, तो इस अवधि को संसद द्वारा कानून पारित करके एक समय में अधिकाधिक एक वर्ष के लिए बढ़ाया जा सकता है तथा उद्घोषणा के अप्रचालनरत होने के पश्‍चात किसी भी मामले में यह अवधि छ: माह से अधिक नहीं होगी।

    लोकसभा की वेबसाइट पर जाएं...

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    स्रोत : www.xn--i1bj3fqcyde.xn--11b7cb3a6a.xn--h2brj9c

    भारतीय चुनाव

    भारतीय चुनाव

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    भारत प्रवेशद्वार देवासं

    चुनाव- लोकतंत्र & राजनीति का आधार स्तम्भ हैं। आजादी के बाद से भारत में चुनावों ने एक लंबा रास्ता तय किया है।

    अनुक्रम

    1 (PM/लोकसभा) चुनाव

    2 राष्ट्रीय चुनावों नामांकन

    2.1 राष्ट्रपति चुनाव (लोकसभा एवं राज्य सभा और विधान सभा → राष्ट्रपति)

    2.2 उपराष्ट्रपति चुनाव ( नामांकन एवं मतदाता → राज्य सभा)

    3 राजनैतिक पार्टियों का इतिहास

    4 चुनाव आयोग 5 चुनावी प्रक्रिया 5.1 चुनाव के पहले 5.2 मतदान का दिन[5] 5.3 चुनाव के बाद 6 मतदाता पंजीकरण 7 दूरस्थ मतदान

    8 भारत में चुनावों का इतिहास

    8.1 लोकसभा चुनाव

    8.2 प्रथम लोकसभा (1952)

    8.3 दूसरी लोकसभा (1957)

    8.4 तीसरी लोकसभा (1962)

    8.5 चौथी लोकसभा (1967)

    8.6 5वीं लोकसभा (1971)

    8.7 6वीं लोकसभा (1977)

    8.8 7वीं लोकसभा (1980)

    8.9 8वीं लोकसभा (1984-1985)

    8.10 9वीं लोकसभा (1989)

    8.11 10वीं लोकसभा (1991)

    8.12 11वीं लोकसभा (1996)

    8.13 12वीं लोकसभा (1998)

    8.14 13वीं लोकसभा (1999)

    8.15 14 वीं लोकसभा (2004)

    8.16 15वीं लोकसभा (2009)

    8.17 १६वीं लोकसभा (२०१४)

    8.18 17वीं लोकसभा (2019)

    9 इन्हें भी देखें 10 सन्दर्भ 11 बाहरी कड़ियाँ

    (PM/लोकसभा) चुनाव

    1951-52 को हुए आम चुनावों में मतदाताओं की संख्या 17,32,12,343 थी, जो 2014 में बढ़कर 81,45,91,184 हो गई है।[1] 2004 में, भारतीय चुनावों में 670 मिलियन मतदाताओं ने भाग लिया (यह संख्या दूसरे सबसे बड़े यूरोपीय संसदीय चुनावों के दोगुने से अधिक थी) और इसका घोषित खर्च 1989 के मुकाबले तीन गुना बढ़कर $300 मिलियन हो गया। इन चुनावों में दस लाख से अधिक इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों का इस्तेमाल किया गया।[2] 2009 के चुनावों में 714 मिलियन मतदाताओं ने भाग लिया[3] (अमेरिका और यूरोपीय संघ की संयुक्त संख्या से भी अधिक).[4]

    मतदाताओं की विशाल संख्या को देखते हुए चुनावों को कई चरणों में आयोजित किया जाना आवश्यक हो गया है (2004 के आम चुनावों में चार चरण थे और 2009 के चुनावों में पांच चरण थे)। चुनावों की इस प्रक्रिया में चरणबद्ध तरीके से काम किया जाता है, इसमें भारतीय चुनाव आयोग द्वारा चुनावों की तिथि की घोषणा, जिससे राजनैतिक दलों के बीच "आदर्श आचार संहिता" लागू होती है, से लेकर परिणामों की घोषणा और सफल उम्मीदवारों की सूची राज्य या केंद्र के कार्यकारी प्रमुख को सौंपना शामिल होता है। परिणामों की घोषणा के साथ चुनाव प्रक्रिया का समापन होता है और नई सरकार के गठन का मार्ग प्रशस्त होता है।

    राष्ट्रीय चुनावों नामांकन

    राष्ट्रपति चुनाव (लोकसभा एवं राज्य सभा और विधान सभा → राष्ट्रपति)

    भारत के राष्ट्रपति का चुनाव 5 साल के लिए अप्रत्यक्ष रूप से किया जाता है। इसके लिए निर्वाचन मंडल का प्रयोग किया जाता है जहां लोक सभा व राज्य सभा के सदस्य और भारत के सभी प्रदेशों तथा क्षेत्रों की विधान सभाओं के सदस्य अपना वोट डालते हैं।

    भारतीय संसद में राष्ट्रप्रमुख- भारत के राष्ट्रपति - और दो सदन शामिल हैं जो विधानमंडल होते हैं। भारत के राष्ट्रपति का चुनाव पांच वर्ष की अवधि के लिए निर्वाचक मंडल द्वारा किया जाता है जिसमें संघ और राज्य के विधानमंडलों के सदस्य शामिल होते हैं।

    भारत की संसद के दो सदन हैं। लोक सभा में 545 सदस्य होते हैं, 543 सदस्यों का चयन पांच वर्षों की अवधि के लिए एकल सीट निर्वाचन क्षेत्रों से होता है और दो सदस्यों को एंग्लो-भारतीय समुदाय का प्रतिनिधित्व करने के लिए चुना जाता है (भारतीय संविधान में उल्लेख के अनुसार, अब तक में 545 सदस्य होते हैं, 543 सदस्यों का चयन पांच वर्षों की अवधि के लिए होता है और दो सदस्यों को एंग्लो-भारतीय समुदाय का प्रतिनिधित्व करने के लिए चुना जाता है)। 550 सदस्यों का चयन बहुमत निर्वाचन प्रणाली के तहत होता है।

    उपराष्ट्रपति चुनाव ( नामांकन एवं मतदाता → राज्य सभा)

    राज्य सभा के सदस्यों का चयन अप्रत्यक्ष रूप से होता है और ये लगभग पूरी तरह से अलग-अलग राज्यों की विधानसभा के सदस्यों द्वारा निर्वाचित किए जाते हैं, जबकि 12 सदस्यों का नामांकन भारत के राष्ट्रपति द्वारा किया जाता है, इसमें आमतौर पर भारत के प्रधानमंत्री की सलाह और सहमति शामिल होती है। राज्य सभा के बारे में अधिक जानकारी http://rajyasabha.nic.in/rsnew/about_parliament/rajya_sabha_introduction.asp पर पायी जा सकती है।

    राज्यों की परिषद () में 245 सदस्य होते हैं, जिनमें 233 सदस्यों का चयन छह वर्ष की अवधि के लिए होता है, जिसमें हर दो साल में एक तिहाई अवकाश ग्रहण करते हैं। इन सदस्यों का चयन राज्य और केंद्र (संघ) शासित प्रदेशों के विधायकों द्वारा किया जाता है। निर्वाचित सदस्यों का का चयन आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली के तहत एकल अंतरणीय मत के माध्यम से किया जाता है। बारह नामित सदस्यों को आमतौर पर प्रख्यात कलाकारों (अभिनेताओं सहित), वैज्ञानिकों, न्यायविदों, खिलाड़ियों, व्यापारियों और पत्रकारों और आम लोगों में से चुना जाता है।

    राजनैतिक पार्टियों का इतिहास

    भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का प्रभुत्व पहली बार 1977 में टूटा जब इंदिरा गांधी के नेतृत्व में पार्टी को अन्य सभी बड़े दलों के गठबंधन से हार का सामना करना पड़ा, ये सभी दल 1975-1977 में विवादित आपातकाल लागू करने का विरोध कर रहे थे। इसी प्रकार विश्वनाथ प्रताप सिंह के नेतृत्व में के एक गठबंधन ने 1989 में भ्रष्टाचार के आरोप झेल रहे राजीव गांधी को हराकर सत्ता में प्रवेश किया। इसे भी 1990 में सत्ता से हटना पड़ा।

    1992 में, भारत में अब तक चली आ रही एक पार्टी के प्रभुत्व वाली राजनीति ने गठबंधन प्रणाली को रास्ता दिया, जिसमें कोई एक पार्टी सरकार बनाने के लिए संसद में बहुमत की उम्मीद नहीं कर सकती थी, लोकिन उसे अन्य पार्टियों के साथ गठबंधन करना होता था और सरकार बनाने के लिए बहुमत सिद्ध करना होता था। इससे मजबूत क्षेत्रीय दलों का महत्व बढ़ गया जो अब तक केवल क्षेत्रीय आकांक्षाओं तक ही सीमित थे। एक तरफ जहां तेदेपा और अन्नाद्रमुक जैसे दल पारंपरिक रूप से मजबूत क्षेत्रीय दावेदार बने हुए थे वहीं दूसरी ओर 1990 के दशक में लोक दल, समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी और जनता दल जैसे अन्य क्षेत्रीय दलों का भी उदय हुआ। ये दल पारंपरिक रूप से क्षेत्रीय आकांक्षाओं पर आधारित होते थे, (जैसे तेलंगाना राष्ट्र समिति) या पूरी तरह से जाति आधारित होते थे, (जैसे बहुजन समाज पार्टी जो दलितों का प्रतिनिधित्व करने का दावा करती है)।

    स्रोत : hi.wikipedia.org

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    Mohammed 15 day ago
    4

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