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    mata ka anchal class 10 question answer

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    NCERT Solutions For Class 10 Kritika II Hindi Chapter 1

    NCERT Solutions For Class 10 Kritika II Hindi Chapter 1

    NCERT Solutions for Class 10 Hindi Kritika Chapter 1 माता का आँचल

    March 25, 2019 by phani

    Formulae Handbook for Class 10 Maths and Science

    NCERT Solutions for Class 10 Hindi Kritika Chapter 1 माता का आँचल is part of NCERT Solutions for Class 10 Hindi. Here we have given NCERT Solutions for Class 10 Hindi Kritika Chapter 1 माता का आँचल.

    Board CBSETextbook NCERTClass Class 10Subject Hindi KritikaChapter Chapter 1Chapter Name माता का आँचलNumber of Questions Solved 24Category NCERT Solutions

    NCERT Solutions for Class 10 Hindi Kritika Chapter 1 माता का आँचल

    पाठ्यपुस्तक के प्रश्न-अभ्यास

    प्रश्न 1.

    प्रस्तुत पाठ के आधार पर यह कहा जा सकता है कि बच्चे का अपने पिता से अधिक जुड़ाव था, फिर भी विपदा के समय वह पिता के पास न जाकर माँ की शरण लेता है। आपकी समझ से इसकी क्या वजह हो सकती है?

    उत्तर-

    यह बात सच है कि बच्चे (लेखक) को अपने पिता से अधिक लगाव था। उसके पिता उसका लालन-पालन ही नहीं करते थे, उसके संग दोस्तों जैसा व्यवहार भी करते थे। परंतु विपदा के समय उसे लाड़ की जरूरत थी, अत्यधिक ममता और माँ की गोदी की जरूरत थी। उसे अपनी माँ से जितनी कोमलता मिल सकती थी, उतनी पिता से नहीं। यही कारण है कि संकट में बच्चे को माँ या नानी याद आती है, बाप या नाना नहीं। माँ का लाड़ घाव को भरने वाले मरहम का काम करता है।

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    प्रश्न 2.

    आपके विचार से भोलानाथ अपने साथियों को देखकर सिसकना क्यों भूल जाता है?

    उत्तर

    शिशु अपनी स्वाभाविक आदत के अनुसार अपनी उम्र के बच्चों के साथ खेलने में रुचि लेता है। उनके साथ खेलना अच्छा लगता है। अपनी उम्र के साथ जिस रुचि से खेलता है वह रुचि बड़ों के साथ नहीं होती है। दूसरा कारण मनोवैज्ञानिक भी है-बच्चे को अपने साथियों के बीच सिसकने या रोने में हीनता का अनुभव होता है। यही कारण है कि भोलानाथ अपने साथियों को देखकर सिसकना भूल जाता है।

    प्रश्न 3.

    आपने देखा होगा कि भोलानाथ और उसके साथी जब-तब खेलते-खाते समय किसी न किसी प्रकार की तुकबंदी करते हैं। आपको यदि अपने खेलों आदि से जुड़ी तुकबंदी याद हो तो लिखिए।

    उत्तर- परीक्षोपयोगी नहीं। प्रश्न 4.

    भोलानाथ और उसके साथियों के खेल और खेलने की सामग्री आपके खेल और खेलने की सामग्री से किस प्रकार भिन्न है?

    उत्तर-

    भोलानाथ और उसके साथियों के खेल और खेलने की सामग्री से हमारे खेल और खेल सामग्रियों में कल्पना से अधिक अंतर आ गया है। भोलानाथ के समय में परिवार से लेकर दूर पड़ोस तक आत्मीय संबंध थे, जिससे खेलने की स्वच्छंदता थी। बाहरी घटनाओं-अपहरण आदि का भय नहीं था। खेल की सामग्रियाँ बच्चों द्वारा स्वयं निर्मित थीं। घर की अनुपयोगी वस्तु ही उनके खेल की सामग्री बन जाती थी, जिससे किसी प्रकार ही हानि की संभावना नहीं थी। धूल- मिट्टी से खेलने में पूर्ण आनंद की अनुभूति होती थी। न कोई रोक, न कोई डर, न किसी का निर्देशन । जो था वह सब सामूहिक बुधि की उपज थी।

    आज भोलानाथ के समय से सर्वथा भिन्न खेल और खेल सामग्री और ऊपर से बड़ों का निर्देशन और सुरक्षा हर समय सिर पर हावी रहता है। आज खेल सामग्री स्वनिर्मित न होकर बाज़ार से खरीदी हुई होती है। खेलने की समय-सीमा भी तय कर दी जाती है। अतः स्वच्छंदता नहीं होती है। धूल-मिट्टी से बच्चों का परिचय ही नहीं होता है।

    प्रश्न 5.

    पाठ में आए ऐसे प्रसंगों का वर्णन कीजिए जो आपके दिल को छू गए हों?

    उत्तर-

    पाठ का सबसे रोमांचक प्रसंग वह है जब एक साँप सब बच्चों के पीछे पड़ जाता है। तब वे बच्चे किस प्रकार गिरते-पड़ते भागते हैं और माँ की गोद में छिपकर सहारा लेते हैं-यह प्रसंग पाठक के हृदय को भीतर तक हिला देता है। | इस पाठ में गुदगुदाने वाले प्रसंग भी अनेक हैं। विशेष रूप से बच्चे के पिता का मित्रतापूर्वक बच्चों के खेल में शामिल होना मन को छू लेता है। जैसे ही बच्चे भोज, शादी या खेती का खेल खेलते हैं, बच्चे का पिता बच्चा बनकर उनमें शामिल हो जाता है। पिता का इस प्रकार बच्चा बन जाना बहुत सुखद अनुभव है जो सभी पाठकों को गुदगुदा देता है।

    प्रश्न 6.

    इस उपन्यास के अंश में तीस के दशक की ग्राम्य संस्कृति का चित्रण है। आज की ग्रामीण संस्कृति में आपको किस तरह के परिवर्तन दिखाई देते हैं।

    उत्तर-

    आज की ग्रामीण संस्कृति को देखकर और इस उपन्यास के अंश को पढ़कर ऐसा लगता है कि कैसी अच्छी रही होगी वह समूह-संस्कृति, जो आत्मीय स्नेह और समूह में रहने का बोध कराती थी। आज ऐसे दृश्य दिखाई नहीं देते हैं। पुरुषों की सामूहिक-कार्य प्रणाली भी समाप्त हो गई है। अतः ग्रामीण संस्कृति में आए परिवर्तन के कारण वे दृश्य नहीं दिखाई देते हैं जो तीस के दशक में रहे होंगे-

    आज घर सिमट गए हैं। घरों के आगे चबूतरों का प्रचलन समाप्त हो गया है।

    आज परिवारों में एकल संस्कृति ने जन्म ले लिया, जिससे समूह में बच्चे अब दिखाई नहीं देते।

    आज बच्चों के खेलने की सामग्री और खेल बदल चुके हैं। खेल खर्चीले हो गए हैं। जो परिवार खर्च नहीं कर पाते हैं वे बच्चों को हीन-भावना से बचाने के लिए समूह में जाने से रोकते हैं।

    आज की नई संस्कृति बच्चों को धूल-मिट्टी से बचना चाहती है।

    घरों के बाहर पर्याप्त मैदान भी नहीं रहे, लोग स्वयं डिब्बों जैसे घरों में रहने लगे हैं।

    प्रश्न 7.

    पाठ पढ़ते-पढ़ते आपको भी अपने माता-पिता का लाड़-प्यार याद आ रहा होगा। अपनी इन भावनाओं को डायरी

    में अंकित कीजिए। उत्तर-

    छात्र स्वयं अपने अनुभव अंकित करें।

    प्रश्न 8.

    यहाँ माता-पिता का बच्चे के प्रति जो वात्सल्य अक्त हुआ है उसे अपने शब्दों में लिखिए।

    उत्तर-

    पिता का अपने साथ शिशु को नहला-धुलाकर पूजा में बैठा लेना, माथे पर तिलक लगाना फिर कंधे पर बैठाकर गंगा तक ले जाना और लौटते समय पेड़ पर बैठाकर झूला झुलाना कितना मनोहारी दृश्य उत्पन्न करता है।

    पिता के साथ कुश्ती लड़ना, बच्चे के गालों का चुम्मा लेना, बच्चे के द्वारा पूँछे पकड़ने पर बनावटी रोना रोने का नाटक और शिशु को हँस पड़ना अत्यंत जीवंत लगता है।

    स्रोत : www.learncbse.in

    NCERT Solutions for CBSE Class 10 Hindi Kritika: Mata Ka Anchal

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    NCERT Solutions for Class 10 Hindi Kritika Chapter 1 - Mata Ka Anchal PDF Download

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    प्रश्न-अभ्यास

    1. प्रस्तुत पाठ के आधार पर यह कहा जा सकता है कि बच्चे का अपने पिता से अधिक जुड़ाव था, फिर भी विपदा के समय वह पिता के पास न जाकर माँ की शरण लेता है। आपकी समझ से इसकी क्या वजह हो सकती है?

    उत्तर: माता से बच्चे का रिश्ता ममता पे आधारित होता है जबकि पिता से बच्चे का रिश्ता स्नेह से रहता है इसलिए जब बच्चा विपदा की परिस्थिति में होता है तो वह ममता से भरे स्नेह का भूखा होता है जिसके कारण वह पिता के पास न जा कर माला की आँचल में छुप जाता है। हमने अक्सर देखा है की जब हमें दर्द होता है तो हम माँ या मम्मी कह कर चिल्लाते है पिता या पापा कह कर नहीं वह इसलिए ककी बच्चा माँ के पास पिता से ज्यादा प्यार और ममता पता है। इसलिए भोलानाथ का अपने पिता से अपार प्रेम होने के बाद भी वह माँ को ही याद किया करता था।

    2. आपके विचार से भोलानाथ अपने साथियों को देखकर सिसकना क्यों भूल जाता है?

    उत्तर: पल में रोना पल में है देना बच्चो का स्वाभाव होता है भोलानाथ भी जब अपने उम्र के अपने मित्रो के साथ होता है तो बहुत खुश होता है व् खेलने में रूचि लेता है उसे अपने मित्रो के साथ तरह-तरह के खेल खेलने में बहुत आनंद आता है। अपने मित्रो को खेलता देख वह भी उनमे रम जाता है इसलिए वह अपने मित्रो के साथ सिसकना भूल जाता है।

    3. भोलानाथ और उसके साथियों के खेल और खेलने की सामग्री आपके खेल और खेलने की सामग्री से किस प्रकार भिन्न है?

    उत्तर: भोलानाथ व उसके साथी खिलने के लिए आंगन में पड़ी चीजों का इस्तेमाल करते थे। वह मिट्टी के बर्तन, व घर का छोटा मोटा सामान ही इस्तेमाल करते थे और इन्ही चीजों से खेलने पर उनको ख़ुशी मिलती थी लेकिन आज के दौर की बात करे तो अब के बच्चे इन चीजों से खेलना पसंद नहीं करेंगे। अब के बच्चो के लिए खेलने के सामान में बहुत कुछ है जैसे क्रिकेट का सेट, डॉक्टर का सेट, किचन का सेट तरह-तरह के वीडियो गेम्स। भोलानाथ व् उसके साथियो के खेलने के सामान में कोई खर्चा नहीं होता।

    4. पाठ में आए ऐसे प्रसंगों का वर्णन कीजिए जो आपके दिल को छू गए हों?

    स्रोत : www.vedantu.com

    माता का आँचल

    Class 10 Hindi Kritika Chapter 1 Mata Ka Anchal Question Answer - कक्षा 10 हिंदी कृतिका पाठ 1 माता का आँचल बोध-प्रश्न

    माता का आँचल – Mata Ka Anchal Class 10 Question Answer

    June 23, 2022 by Rajni | M.A. Hindi, UGCNET Hindi Literature, PhD Aspirant

    इस लेख में हम कक्षा दस की पुस्तक कृतिका के पहले अध्याय ‘माता का आँचल’ नामक पाठ के बोध प्रश्नों (hindi kritika class 10 chapter 1 mata ka anchal question answer) को हल करेंगे।

    Class 10 Hindi Kritika Chapter 1 Mata Ka Anchal Question Answer

    कक्षा 10 हिंदी कृतिका पाठ 1 माता का आँचल बोध-प्रश्न 

    माता का आँचल प्रश्न 1:

    प्रस्तुत पाठ के आधार पर कहा जा सकता है कि बच्चे का अपने पिता से अधिक जुड़ाव था, फिर भी विपदा के समय वह पिता के पास न जाकर माँ की शरण लेता है। आपकी समझ से इसकी क्या वजह हो सकती है?

    Mata ka anchal पहला उत्तर:

    बच्चे का अपने पिता से अधिक जुड़ाव हो, तो भी वह अपनी माँ के आँचल में खुद को ज्यादा अच्छा महसूस करता है। माँ का स्नेह उसके मन में बैठे डर को दूर कर देता है। भोलानाथ का अपने पिता जी से बहुत स्नेह था। पर जब उस पर विपदा आई, तो उसे जो शांति और प्रेम माँ की गोद में जाकर महसूस हुआ, वह शायद पिता के साथ नहीं हो पाता।

    माता का आँचल प्रश्न 2:

    आपके अनुसार भोलानाथ अपने साथियों को देखकर सिसकना क्यों भूल जाता है?

    Mata ka anchal दूसरा उत्तर:

    भोलानाथ अपने साथियों को देखकर सिसकना इसलिए भूल जाता है क्योंकि जब भोलानाथ अपने मित्रों को मज़े से खेलते हुए देखता है, तो खुद को नहीं रोक पाता और रोना भूलकर अपने साथियों के साथ खेलने लगता है।

    माता का आँचल प्रश्न 3:

    आपने देखा होगा कि भोलानाथ और उसके साथी जब-तब खेलते-खाते समय किसी न किसी प्रकार की तुकबंदी करते हैं। आपको यदि अपने खेलों आदि से जुड़ी तुकबंदी याद हो तो लिखिए।

    Mata ka anchal तीसरा उत्तर:

    मुझे अपने बचपन के कुछ खेलों से जुड़ी तुकबन्दियाँ याद हैं-

    अक्कड़-बक्कड़ बम्बे बो,

    अस्सी नब्बे पूरे सौ।

    पोषम पा भई पोषम पा,

    डाकिये ने क्या किया।

    आदा पादा किसने पादा।

    माता का आँचल प्रश्न 4:

    भोलानाथ और उसके साथियों के खेल और खेलने की सामग्री आपके खेल और खेलने की सामग्री से किस प्रकार भिन्न है?

    Mata ka anchal चौथा उत्तर:

    भोलानाथ और उसके साथियों के खेल और खेलने की सामग्री कुछ इस प्रकार से है, वे आँगन या खेतों में खेला करते थे। उनके खेल की सामग्री मिट्टी के बर्तन, पत्थर, पेड़ों के फल, गीली मिट्टी, घर पर पड़े छोटे-मोटे सामान आदि होती थी।

    आज के समय में बच्चे घर पर ही खेलते हैं। हमारे समय के बच्चे जो खेल खेलते हैं, वे इनसे अलग है। इनके खेलने के लिए क्रिकेट, फुटबॉल, किचन सेट, डॉक्टर सेट, वीडियो गेम्स आदि बहुत सी चीजें हैं। अब के बच्चे ज्यादा शारीरिक श्रम वाले खेल नहीं खेलते।

    माता का आँचल प्रश्न 5:

    पाठ में आए ऐसे प्रसंगों का वर्णन कीजिए जो आपके दिल को छू गए हो?

    Mata ka anchal पांचवा उत्तर:

    पाठ में आए ऐसे कुछ प्रसंग हैं, जो मेरे दिल को छू गए है–

    पिता द्वारा बच्चे को नहलाना- धुलाना, उसे अपने साथ सुलाना, उसे कंधे पर घुमाने ले जाना और खेलते समय जान बूझकर हार जाना।अपने साथ मछलियों को चारा खिलाने ले जाना और उनके खेलों में शामिल होना, बच्चों का अपने पिता के साथ कुश्ती करना। पिता द्वारा बच्चे के बल को बढ़ावा देना और पछाड़ खाकर गिर जाना।

    बच्चा जब सांप से डरकर घर भाग गया, तब वह लहूलुहान होकर अपनी माँ के आँचल में छुप गया। बच्चे को रोते देखकर माँ खुद रोने लगी।

    माता का आँचल प्रश्न 6:

    इस उपन्यास अंश में तीस के दशक की ग्रामीण संस्कृति का चित्रण है आज की ग्रामीण संस्कृति में आपको किस तरह के परिवर्तन दिखाई देते है?

    Mata ka anchal छठवाँ उत्तर:

    आज की ग्रामीण संस्कृति तीस के दशक की ग्रामीण संस्कृति से अलग है। उस समय बच्चे अपने मनोरंजन के लिए मिट्टी से खेलते थे। अब प्लास्टिक से बने खिलौनों से खेलते हैं। वीडियो गेम्स, कंप्यूटर पर ही अपना समय बीताते हैं। अब गाँव के बच्चे स्कूल जाते हैं और उनके माता-पिता भी बच्चों की शिक्षा पर ध्यान देते हैं। बच्चे मोबाइल और कंप्यूटर की जानकारी भी रखते हैं। आजकल कृषि करने के ढंग में परिवर्तन आया है। बैलों की जगह ट्रेक्टर, बैलों से सिंचाई की जगह ट्यूबेल आ गए हैं।

    माता का आँचल प्रश्न 7:

    पाठ पढ़ते-पढ़ते आपको भी अपने माता-पिता का लाड-प्यार याद आ रहा होगा अपनी इन भावनाओं को डायरी में अंकित कीजिए।

    Mata ka anchal सातवां उत्तर:

    पाठ पढ़ते-पढ़ते मुझे मेरे बचपन की एक घटना याद आ रही है। एक दिन मैं घर के पास मैदान में खेल रही थी। वहीँ कुछ बच्चे क्रिकेट खेल रहे थे। उनकी बॉल मेरी आँख में लगी और मैं ज़ोर से रोने लगी। मेरे साथ वहाँ खेल रहे बच्चों ने मेरी माँ को जाकर बताया। फिर माँ मुझे डॉक्टर के पास ले गई और पिता जी भी अपने दफ्तर का काम छोड़कर वहीँ आ गए। जब डॉक्टर ने कहा कि डरने की कोई बात नहीं है, तब दोनों की जान में जान आई।

    माता का आँचल प्रश्न 8:

    यहाँ माता-पिता का बच्चे के प्रति जो वात्सल्य व्यक्त हुआ है उसे अपने शब्दों में लिखिए।

    Mata ka anchal आठवाँ उत्तर:

    यहाँ माता-पिता का बच्चे के प्रति जो वात्सल्य व्यक्त हुआ है, वह इस प्रकार है-

    पिता का अपने बच्चे को नहलाना-धुलाना, पूजा में साथ बैठाना, माथे पर तिलक लगाना और बच्चे को कंधे पर बैठाकर गंगा घाट तक ले जाना इत्यादि प्रसंगों में पिता द्वारा वात्सल्य व्यक्त हुआ है।

    माँ का अपने बच्चे को दुलार करना, तोता-मैना आदि के बनावटी नाम से निवाला बनाकर खिलाना, बच्चे को काला टिका लगाना, उसकी चोटी बनाना, फूलदार लट्टू बाँधकर रंगीन कुर्ता- टोपी पहनाना इत्त्यादि प्रसंगों में माँ का वात्सल्य व्यक्त हुआ है।

    माता का आँचल प्रश्न 9:

    माता का आँचल शीर्षक की उपयुक्तता बताते हुए कोई अन्य शीर्षक सुझाए।

    Mata ka anchal नौवां उत्तर:

    माता का आँचल शीर्षक उपयुक्त इसलिए है क्योंकि बच्चों को कितना भी प्यार-दुलार मिल जाए, लेकिन विपदा के समय वह हमेशा माँ के पास ही जाते हैं। इसका अन्य शीर्षक ‘माँ की ममता’ हो सकता है क्योंकि कहानी में माँ का स्नेह ही प्रधान है।

    माता का आँचल प्रश्न 10:

    बच्चे माता-पिता के प्रति अपने प्रेम को कैसे अभिव्यक्त करते हैं?

    Mata ka anchal दसवां उत्तर:

    बच्चे अपने माता-पिता के प्रति प्रेम अपने व्यवहार से ही अभिव्यक्त करते हैं। वे अपने माता-पिता की इच्छा को पूरा करने का प्रयास करते हैं। उनका सम्मान करते हैं और उनकी भावनाओं का ख्याल रखते हैं।

    स्रोत : poemgyan.com

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    Mohammed 7 day ago
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