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    sindhu sabhyata sadhan sampann thi per usmein bhavyata ka number nahin tha kaise

    Mohammed

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    Question

    सिंधु-सभ्यता साधन-संपन्न थी, पर उसमें भव्यता का आडंबर नहीं था। कैसे?

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    सिंधु-सभ्यता साधन-संपन्न थी। इसके प्रमाण मुअनजो-दड़ो में चारों ओर बिखरे हुए हैं। शहर का व्यवस्थित रूप, चारों ओर मकान की सुविधा संपन्न बनावट, पानी की निकासी की उत्तम व्यवस्था, सड़कों का आकार तथा बनावट, विशाल स्नानागार, कुओं की व्यवस्था, तांबे का प्रयोग, पत्थरों का प्रयोग, कपड़ों पर रंगाई, पूजास्थल, अन्य स्थानों से व्यापार संबंध, खेती के सबूत इत्यादि बातें इसकी भव्यता की कहानी कह जाते हैं। वहाँ पर किसी प्रकार के राजप्रसाद दिखाई नहीं देते हैं। न ही ऐसे प्रमाण मिलते हैं, जिससे वहाँ किसी बड़े मंदिर का पता चले। वहाँ पर विकसित सभ्यता के चिह्न मिलते हैं। जहाँ पर सब साधन विद्यमान थे। इन्हीं सब पर दृष्टि डालने के बाद कहा गया है कि सिंधु-सभ्यता साधन-संपन्न थी, पर उसमें भव्यता का आडंबर नहीं था।

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    स्रोत : byjus.com

    NCERT Solutions class 12 Hindi Core Ateet Mein Dabe Paavan

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    NCERT Solutions class 12 Hindi Core Ateet Mein Dabe Paavan

    May 19, 2016 by myCBSEguide

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    1. सिंधु-सभ्यता साधन-संपन्न थीपर उसमें भव्यता का आडंबर नहीं था। कैसे?उत्तर:- सिन्धु सभ्यता, एक साधन-सम्पन्न सभ्यता थी परन्तु उसमें राजसत्ता या धर्मसत्ता के चिह्न नहीं मिलते। वहाँ की नगर योजना, वास्तुकला, मुहरों, ठप्पों, जल-व्यवस्था, साफ-सफाई और सामाजिक व्यवस्था आदि की एकरूपता द्वारा उनमें अनुशासन देखा जा सकता है। यहाँ पर सब कुछ आवश्यकताओं से ही जुड़ा हुआ है, भव्यता का प्रदर्शन कहीं नहीं मिलता। अन्य सभ्यताओं में राजतंत्र और धर्मतंत्र की ताकत को दिखाते हुए भव्य महल, मंदिर ओर मूर्तियाँ बनाई गईं किंतु सिन्धु घाटी सभ्यता की खुदाई में छोटी-छोटी मूर्तियाँ,खिलौने, मृद-भांड, नावें मिली हैं। ‘नरेश’ के सर पर रखा मुकुट भी छोटा है। इसमें प्रभुत्व या दिखावे के तेवर कहीं दिखाई नहीं देते।

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    2. ‘सिंधु-सभ्यता की खूबी उसका सौंदर्य-बोध है जो राज-पोषित या धर्म-पोषित न होकर समाज-पोषित था।‘ ऐसा क्यों कहा गया

    उत्तर:- सिंधु घाटी के लोगों में कला या सुरुचि का महत्त्व ज्यादा था। वास्तुकला या नगर-नियोजन ही नहीं, धातु और पत्थर की मूर्तियाँ, मृद्-भांड, उन पर चित्रित मनुष्य, वनस्पति और पशु-पक्षियों की छवियाँ, सुनिर्मित मुहरें, उन पर बारीकी से उत्कीर्ण आकृतियाँ, खिलौने, केश-विन्यास, आभूषण और सबसे ऊपर सुघड़ अक्षरों का लिपिरूप सिंधु सभ्यता को तकनीक-सिद्धि से ज्यादा कला-सिद्धि ज़ाहिर करता है। अन्य सभ्यताओं में राजतंत्र और धर्मतंत्र की ताकत को दिखाते हुए भव्य महल, मंदिर ओर मूर्तियाँ बनाई गईं किंतु सिन्धु घाटी सभ्यता की खुदाई में छोटी-छोटी मूर्तियाँ, खिलौने, मृद-भांड, नावें मिली हैं। ‘नरेश’ के सर पर रखा मुकुट भी छोटा है। इसमें प्रभुत्व या दिखावे के तेवर कहीं दिखाई नहीं देते। यहाँ आम आदमी के काम आने वाली चीजों को सलीके से बनाया गया है।

    अतः सिन्धु सभ्यता की खूबी उसका सौन्दर्यबोध है जो कि समाज पोषित है, राजपोषित या धर्मपोषित नहीं है।

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    3. पुरातत्त्व के किन चिह्नों के आधार पर आप यह कह सकते हैं कि – सिंधु-सभ्यता ताकत से शासित होने की अपेक्षा समझ से अनुशासित सभ्यता थी। 

    उत्तर:- हड़प्पा संस्कृति में न भव्य राजप्रसाद मिले हैं, न मंदिर। न राजाओं, महंतों की समाधियाँ। यहाँ के मूर्तिशिल्प छोटे हैं और औज़ार भी। मुअनजो-दड़ो ‘नरेश’ के सर पर रखा मुकुट भी छोटा है। दूसरी जगहों पर राजतंत्र या धर्मतंत्र की ताकत का प्रदर्शन करने वाले महल, उपासना-स्थल, मूर्तियाँ और पिरामिड आदि मिलते हैं। यहाँ आम आदमी के काम आने वाली चीजों को सलीके से बनाया गया है। यहाँ नगरयोजना, वास्तुकला, मुहरों, ठप्पों, जल-व्यवस्था, साफ-सफाई और सामाजिक व्यवस्था आदि में एकरूपता देखने मिलती है। इन आधारों पर विद्वान यह मानते है कि ‘सिंधु-सभ्यता ताकत से शासित होने की अपेक्षा समझ से अनुशासित सभ्यता थी।’

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    4. ‘यह सच है कि यहाँ किसी आँगन की टूटी-फूटी सीढ़ियाँ अब आप को कहीं नहीं ले जातींवे आकाश की तरफ़ अधूरी रह जाती हैं। लेकिन उन अधूरे पायदानों पर खड़े होकर अनुभव किया जा सकता है कि आप दुनिया की छत पर हैंवहाँ से आप इतिहास को नहीं उस के पार झाँक रहे हैं।‘ इस कथन के पीछे लेखक का क्या आशय है

    उत्तर:- इस कथन से लेखक का आशय है कि इन टूटे-फूटे घरों की सीढ़ियों पर खड़े होकर आप विश्व की सभ्यता के दर्शन कर सकते हैं क्योंकि सिन्धु सभ्यता विश्व की महान सभ्यताओं में से एक है। सिन्धु सभ्यता आडंबररहित एवं अनुशासनप्रिय है। यहाँ के मकानों की सीढ़ियाँ उस कालखंड तथा उससे पूर्व का अहसास कराती हैं जब यह सभ्यता अपने चरम पर रही होगी। यह सभ्यता विश्व की प्राचीनतम सभ्यता है। खंडहरों से मिले अवशेषों और इन टूटे-फूटे घरों से मानवता के चिह्न और मानवजाति के क्रमिक विकास को भी देखा जा सकता है। इसकी नगर योजना अद्वितीय है। उस समय का ज्ञान, उसके द्वारा स्थापित मानदंड आज भी हमारे लिए अनुकरणीय हैं। इस प्रकार हम इन सीढ़ियों पर चढ़कर किसी इतिहास की ही खोज नहीं करना चाहते बल्कि सिन्धु सभ्यता के सभ्य मानवीय समाज को देखना चाहते हैं।

    स्रोत : mycbseguide.com

    सिंधु

    सिंधु-सभ्यता साधन-सपन्न थी, पर उसमें भव्यता का आडबर नहीं था। कैसे?

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    सिंधु-सभ्यता साधन-सपन्न थी, पर उसमें भव्यता का आडबर नहीं था। कैसे?

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    SOLUTION

    सिंधु सभ्यता बहुत संपन्न सभ्यता थी। प्रत्येक तरह के साधन इस सभ्यता में थे। इतना होने के बाद भी इस सभ्यता में दिखावा नहीं था। कोई बनवावटीपन या आडंबर नहीं था। जो भी निर्माण इस सभ्यता के लोगों ने किया, वह सुनियोजित और मनोहारी था। निर्माण शैली साधारण होने के बाद भी दिखावे से कोसों दूर थे। जो वस्तु जिस रूप में सुंदर लग सकती थी, उसका निर्माण उसी ढंग से किया गया था। इसीलिए सिंधु सभ्यता में भव्यता थी, आडंबर नहीं।

    Concept: गद्य भाग

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    Chapter 3: अतीत में दबे पाँव (ओम थानवी) - अभ्यास [Page 52]

    Q 1. Q 2.

    APPEARS IN

    NCERT Class 12 Hindi - Vitaan [हिंदी - वितान १२ वीं कक्षा]

    Chapter 3 अतीत में दबे पाँव (ओम थानवी)

    अभ्यास | Q 1. | Page 52

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    स्रोत : www.shaalaa.com

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    Mohammed 4 day ago
    4

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